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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कलाकारों का किया सम्मान, पुनर्वासितों से संवाद कर बढ़ाया उत्साह।
पुनर्वासितों और पूरी टीम को मिला 01 लाख से अधिक रुपये का प्रोत्साहन।
सुरेश सोनी/बुलंद टाइम्स न्यूज
नारायणपुर। रायगढ़ में 41वें चक्रधर समारोह के भव्य समापन समारोह में 23 सितम्बर को जिला प्रशासन नारायणपुर के विशेष अभिनय कार्यक्रम ‘चंदा चकोर’ की प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। अबूझमाड़ से नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे युवाओं के जीवन में आए बदलाव और उनकी नई यात्रा को कला एवं अभिनय के माध्यम से मंच पर प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में कुल 29 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 11 आत्मसमर्पित एवं पुनर्वासित युवा, स्थानीय कलाकार तथा संगीतकार शामिल रहे। प्रतिभागियों ने विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से स्थानीय जनजीवन और परंपराओं को जीवंत किया। प्रस्तुति में स्थानीय दैनिक जीवन, जात्रा, मेला, विकास और विवाह जैसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रसंगों को अभिनय के माध्यम से दर्शाया गया। इसके साथ ही ‘देश हमारा’ गीत की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को भावपूर्ण रूप प्रदान किया।
‘चंदा चकोर’ केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि अबूझमाड़ में बदलाव की उस यात्रा की अभिव्यक्ति है, जिसमें संघर्ष और हिंसा से दूर होकर पुनर्वासित युवा अपनी प्रतिभा और हुनर के माध्यम से नई पहचान बना रहे हैं। जिला प्रशासन नारायणपुर द्वारा शासन की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने वाले युवाओं को पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान एक माह का विशेष अभिनय एवं रंगमंच प्रशिक्षण राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं की प्रतिभा को पहचानने, निखारने और उसे सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया गया, जिसका परिणाम रायगढ़ के इस मंच पर देखने को मिला।
प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने अभिनय, संवाद अदायगी और भावनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से यह संदेश दिया कि अवसर, विश्वास और सही दिशा मिलने पर जीवन को नई राह दी जा सकती है। अबूझमाड़ के पुनर्वासित युवाओं का मंच पर कलाकार के रूप में सामने आना नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्र में हो रहे सामाजिक बदलाव और मुख्यधारा से जुड़ाव की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करता है।
समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने ‘चंदा चकोर’ की प्रस्तुति का अवलोकन कर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने पुनर्वासित युवाओं से संवाद कर उनकी बातें सुनीं और उनके अनुभवों पर चर्चा की। श्री चौधरी ने 11 पुनर्वासित युवाओं के लिए 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। साथ ही ‘चंदा चकोर’ की 29 सदस्यीय पूरी टीम, जिसमें कलाकारों के साथ संगीतकार भी शामिल हैं, को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस अवसर पर पूरी टीम को शील्ड, शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया।
‘चंदा चकोर’ के माध्यम से नारायणपुर के अबूझमाड़ की यह कहानी कला के मंच से समाज तक पहुंची—जहां पुनर्वासित युवा अपने अतीत से आगे बढ़कर हुनर, संस्कृति और सृजन के माध्यम से नई पहचान गढ़ रहे हैं।




