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बुलंद टाइम्स न्यूज/योगेश्वर साहू
राजिम। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चंपारण में तीन दिनों तक हुई लगातार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। राजिम और राजधानी रायपुर से लगे इस तीर्थ स्थल में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया और देखते ही देखते चंपेश्वर महादेव और वल्लभाचार्य मंदिर परिसर जलमग्न हो गया।
चंपारण निवासी एवन कुमार साहू ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मंदिर चंपारण पंचायत अंतर्गत आता है। इस पवित्र धाम का निर्माण वैष्णव समुदाय के गुजराती भाइयों द्वारा किया गया है। यहां भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर स्थित है, जहां प्रतिदिन गुजराती समाज द्वारा भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। रात्रि के समय रोशनी से जगमगाता यह मंदिर स्वर्ग जैसा प्रतीत होता है और यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
बताया गया कि तीन दिनों की मूसलाधार बारिश के कारण यमुना नदी उफान पर आ गई और नदी का पानी सीधे मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच गया। इससे मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। हालांकि अब बारिश थमने के बाद पानी धीरे-धीरे उतर गया है और स्थिति सामान्य हो गई है। वल्लभाचार्य मंदिर प्रतिदिन शाम 5 बजे भक्तों के दर्शन के लिए खुलता है और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व यहां गुजराती भाइयों द्वारा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
पातपर झांकी का होगा भव्य आयोजन
वहीं चंपारण में अब आस्था के नए रंग की तैयारी शुरू हो गई है। चंपारण की प्रसिद्ध पातपर झांकी इस बार नए अंदाज में भक्तों के सामने आने वाली है। दिनांक 30 सितंबर 2026 को पातपर झांकी में नए थीम और नए स्वरूप के साथ मां काली के विकराल रूप के दर्शन होंगे। आयोजक समिति ने बताया कि इस बार झांकी को और अधिक भव्य, आकर्षक और अलौकिक रूप दिया जा रहा है। इस अद्भुत झांकी को देखने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।




