रिपोर्टर – योगेश्वर साहू
केडीआमा (रमनपुर), गरियाबंद। छत्तीसगढ़ की धार्मिक आस्था और लोकसंस्कृति को नई पहचान देने वाले दसकुंड महोत्सव 2026 में इस बार एक ऐसा आयोजन होने जा रहा है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में है। नवरात्रि पंचमी के दिन जामवंत दादा की रहस्यमयी गुफा में लगभग 100 किलो चावल के आटे से विशाल छत्तीसगढ़ी अंगाकर पान रोटी बनाई जाएगी।
इस अनूठी पहल के पीछे हैं महोत्सव के कार्यक्रम संयोजक राजकुमार यादव। राजकुमार यादव छत्तीसगढ़ की विलुप्त हो रही खान-पान परंपरा को बचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इससे पहले वे 50 किलो की पान रोटी बनाकर सुर्खियों में आ चुके हैं। अब 100 किलो की रोटी बनाकर वे इस परंपरा को और बड़े स्तर पर स्थापित करना चाहते हैं।
छत्तीसगढ़ के गांवों में अंगाकर पान रोटी का बड़ा महत्व है। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि सामूहिकता, अतिथि सत्कार और भाईचारे का प्रतीक है। आधुनिक फास्ट फूड के दौर में इस पारंपरिक व्यंजन को महोत्सव का हिस्सा बनाना नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास है। पंचमी के दिन बनने वाली यह विशाल रोटी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित की जाएगी और महोत्सव के मुख्य आकर्षणों में से एक होगी।
12 किलोमीटर लंबी सुरंग की मान्यता –
दसकुंड धाम की पहचान सिर्फ पान रोटी से नहीं, बल्कि यहां स्थित रहस्यमयी गुफा से भी है। स्थानीय बुजुर्गों और मान्यताओं के अनुसार यह गुफा जामवंत दादा की तपोस्थली है और इससे जुड़ी सुरंग की लंबाई लगभग 12 किलोमीटर बताई जाती है। हालांकि इस मान्यता का वैज्ञानिक और भौगोलिक सत्यापन अभी होना बाकी है, फिर भी यह स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच गहरी जिज्ञासा पैदा करता है।
नौ कुंडों का रहस्य –
दसकुंड नाम के पीछे भी एक कहानी है। यहां नौ जलकुंड – जाम पानी, सुरंग पानी, माहुर पानी, आंवरा पानी, सेम्हर पानी, कुडेरा पानी, कुर्रु पानी, गोइंदला पानी, कुसुम पानी और एक अग्निकुंड की लोकमान्यता है। इन कुंडों से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं क्षेत्र में प्रचलित हैं।
11 से 19 अक्टूबर तक सुरंग पानी धाम स्थित सिद्धेश्वरी वन देवी माता मंदिर में चल रहे इस नौ दिवसीय महोत्सव में वन देवी यज्ञ का आयोजन भी हो रहा है। दसकुंड विकास समिति का उद्देश्य इस आयोजन के जरिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय लोककला, खान-पान और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करना और इसे पर्यटन मानचित्र पर लाना है।




