डे नारायण सिंह बघेल की रिपोर्ट :-
नारायणपुर | वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार (भा.पु.से.) एवं अति. पुलिस अधीक्षक रोबिनसन गुड़िया (भा.पु.से.) के नेतृत्व में नारायणपुर पुलिस के द्वारा सशक्त नक्सल मुक्त बस्तर की कल्पना को साकार रूप देने हेतु लगातार क्षेत्र में सघन नक्सल विरोधी ‘‘माड़ बचाव ’’ अभियान संचालित किया जा रहा है। नारायणपुर पुलिस को इसी अभियान के अन्तर्गत ग्राम काकुर-टेकमेटा के जंगल पहाड़ में हुई पुलिस-नक्सली में बड़ी ऐतिहासिक सफलता मिली थी, जिसमें बेहतर कार्य करने वाले जिला नारायणपुर के पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों को केन्द्रीय दक्षता पदक से सम्मानित किया गया है। क्षेत्र में अभी भी नक्सल विरोधी अभियान जारी है।
भारत सरकार गृह मंत्रालय के द्वारा प्रत्येक वर्ष विशेष ऑपरेशन, जांच और फोरेसिंक विज्ञान के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले देशभर के पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों को केन्द्रीय दक्षता पदक से सम्मानित किया जाता है। वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ राज्य के 182 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों को सम्मानित किये जाने के साथ ही जिला नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार (भा.पु.से.) एवं अति. पुलिस अधीक्षक रोबिन गुड़िया (भा.पु.से.), उप पुलिस अधीक्षक विनय कुमार समेत जिला नारायणपुर पुलिस समेत एसटीएफ के अन्य 57 अधिकारी/कर्मचारियों को इस पदक से सम्मानित किये जाने की घोषणा 31 अक्टूबर, 2024 (दीपावली) को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा किया गया है।
यह उपलब्धि जिला नारायणपुर के साथ ही साथ छत्तीसगढ़ राज्य सहित पूरे देश के लिए बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस पदक की घोषणा प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल के जंयती के अवसर पर की जाती है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा दीपावली पर्व के दिन जारी 31 अक्टूबर के आदेश में तीन वर्ग विशेष ऑपरेशन, जांच और फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्रमें देश एवं राज्य में बेहतर काम करने वालों का चयन सूची जारी किया गया।
विदित हो कि 30 अप्रैल 2024 को काकूर-टेकमेटा जंगल में जिले के पुलिस बल की संयुक्त टीम अदम्य साहस एवं बहादूरी से माओवादियों सेलड़ते हुए 10 माआवेादियों को मार गिराने एवं भारी मात्रा में अत्यधिक हथियारों सहित विस्फोटक सामग्री व नक्सली दैनिक उपयोगी सामग्रीबरामद करने में ऐतिहासिक सफलता मिर्ली थी। यह सफलता उस समय के लिए बहुत बड़ा आंकड़ा था। यह परिणाम जब सामने आया था तब पूरे देश की नजर नारायणपुर की ओर थी।
देश भर की मीड़िया और अन्य वर्गो में इस सफलता के बारे में जानने की उत्सुकता रही तथा इसकी चर्चा देश-विदेश तक हुई। जिला नारायणपुर क्षेत्रान्तर्गत ग्राम काकूर-टेकमेटा जंगल में हुए मुठभेड़ के कुछ माह पहले देश के गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान वर्ष 2026 तक नक्सलियों के सफाया करने की बात कही गई थी। देश के गृह मंत्री के घोषणा के बाद प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों के अंदरूणी इलाको में ‘‘नेयद नेल्लानार योजना’’ के माध्यम से सड़क व मूलभूत सुविधाएं देने का काम जोर-शोर से प्रारंभ किया और बस्तर संभाग के सभी जिलो में संयुक्त ऑपरेशन चलाये जा रहे है। इन ऑपरेशन के चलने से माओवादियों के मौत का आंकड़ा बस्तर संभाग में इतना बड़ गया उतना आंकड़ा एक साल में कभी देखने को नहीं मिला। प्रत्येक वर्ष देश में होने वाले 2 विशेष ऑपरेशन को इस पदक नवाजा जाता है। जिसमें जिला नारायणपुर के काकूर-टेकमेटा ऑपरेशन में छत्तीसगढ़ राज्य को पदक मिलने की घोषणा हुई है यह नारायणपुर सहित छत्तीसगढ़ राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि व गर्व की बात है।
पुलिस अधीक्षक नारायणपुर प्रभात कुमार (भा.पु.से.) ने दक्षता पदक की घोषणा होने पर कहा कि- काकूर-टेकमेटा में नक्सलियों कर उपस्थिति की जानकारी मिलने पर ऑपरेशन लांच किया गया हमारे टीम से बहुत ही मेनहत व सुझबुझ के साथ ऑपरेशन किया था, तभी बड़ी ऐतिहासिक सफलता मिली। उस समय का यह आंकड़ा जिले का सबसे बड़ा आंकड़ा था। काकूर-टेकमेटा ऑपरेशन में रणनीति बनाने ऑपरेशन को लांच करने और परिणाम दिलाने में अहम भूमिका निभाने वालों को केन्द्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक से सम्मानित किये जाने की घोषणा हुई है। ऐसे पदक व सम्मान मिलने से पुलिस अधिकारी व जवानों हौसला बढ़ता है और बेहतर काम करने का निर्णय लेते है।
सीमावर्ती क्षेत्र पर ऑपरेशन करने के लिए योजना तैयार किया और अन्दरूणी इलाके में नेटवर्क को बढ़ाया जिले के काकूर-टेकमेटा जंगल पहाड़ी में नक्सलियों की उपस्थिति की आसूचना मिलने पर आसूचना तस्दीक पर सुरक्षा बल रवाना हुआ। पुलिस अधीक्षक नारायणपुर द्वारा तैयार की गई इस रणनीति को सफल बनाने के लिए नारायणपुर पुलिस द्वारा सफलता पूर्वक नक्सल विरोधी अभियान चलाया गया और यह ऑपरेशन उस समय नारायणपुर जिला के लिए बहुत बड़ा ऐतिहासिक सफलता रही। एक के बाद नारायणपुर पुलिस को क्षेत्र में संचालित नक्सल विरोधी माड़ बचाव अभियान में लगातार बड़ी सफलताएं मिलती रही है। जिसके परिणाम स्वरूप वर्ष 2024 में जिला नारायणपुर में संचालित नक्सल विरोधी अभियान में बड़े एवं छोटे कैडर के अब तक कुल 44 माओवादी मारे गये है एवं 38 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया तथा 14 माओवादी द्वारा आत्मसमर्पण किया गया।
‘‘माड़ बचावों अभियान’’ को सुरक्षा बलों के द्वारा मानसून में भी क्षेत्र के भौगोलिक विकट परिस्थितियों से निपटते हुए अदम्य साहस एवं बहादूरी का परिचय देते हुए माओवादियों से मुकाबला कर नक्सल विरोधी ‘‘माड़ बचाओ अभियान’’ को सफल अभियान बनाया गया। निःसंदेह सुरक्षा बलो का माओवादियों के विरूद्ध कड़ा प्रहार है। लगभग 40 साल से माड़ नक्सलवाद हिंसा व भय से ग्रस्त है लेकिन अब यहांॅ के मूलवासी एवं ग्रामीण हिंसा, भय एवं नक्सलवाद से मुक्त माड़ की कल्पना कर रहे हैं। नक्सल विरोधी सफल अभियानों से विकास को गति तथा आदिवासी एवं ग्रामीणों को विचारों की अभिव्यक्ति मिल रही है।
माड़ क्षेत्र में संचालित ऑपरेशन के उपरांत नक्सलियों के गढ़ रहे जहॉ नक्सली शीर्ष नेतृत्व अपना सुरक्षित ठिकाना मानते है नक्सली नेतृत्व इस ऑपरेशन उपरांत ग्रामीणों एवं अपने निचले कैडर को दोषारोपण कर रहे हैं। नारायणपुर पुलिस द्वारा अनेको बार से नक्सलियों के अटैकिंग फोर्स के स्तम्भ के ऊपर कड़ा प्रहार करते आ रहे है। नारायणपुर पुलिस के अथक प्रयास से माड़ क्षेत्र में विभिन्न नवीन पुलिस जन सुविधा एवं सुरक्षा कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र के ग्रामीण अपने आप को सुरक्षित महसुस कर जीवन यापन कर रहे है तथा शासन/प्रशासन के विकास कार्याे जैसे सड़क, पुल-पुलिया शिक्षा, चिकित्सा, मोबाईल नेटवर्क कनेक्टिविटी इत्यादि मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल रहे है। क्षेत्र में लगातार नक्सल विरोधी अभियान संचालित होने से माओवादियों के भय कम हुआ है और उनकी गतिविधियों पर अंकुश लगा है, जिससे क्षेत्र में अमन, शांति एवं सुरक्षा माहौल बना हुआ है। अभी भी क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान जारी है।
दुर्गम जंगल एवं विकट भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाले मूल निवासियों को नक्सलवादी विचारधारा से बचाना और उन्हें माओवादी सिद्धांतों के आकर्षण से बाहर निकलना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है, ताकि क्षेत्र में विकास एवं शांति कायम हो सके। हम उन सभी मूलवासियों से जो बाहरी विचारधारा और बाहर के नक्सली नेताओं के गलत प्रभाव में फंस गये हैं। अपील करते हैं कि वे नक्सलवाद एवं नक्सली विचारधारा को त्याग कर शासन की आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति को अपनाकर समाज के मुख्य धारा से जुड़े और हथियार और नक्सलवादी विचारधारा का पूर्णतः त्याग व विरोध करें।



