अमित दुबे की रिपोर्ट :-
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का रतनपुर ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरी है. यह लगभग 800 वर्षों तक दक्षिण कौशल छत्तीसगढ़ की राजधानी रही है. यहां के राजाओं ने अपने शासन काल में प्रजा को सुखी एवं संपन्न बनाने के लिए विभिन्न आस्तिक कार्य एवं परंपराएं शुरू की. इनमें से मराठा शासन की कुछ परंपराए आज भी यहां चली आ रही है|
रतनपुर के रामटेकरी मंदिर से हर साल रामनवमी की रात को हनुमान जी की शोभायात्रा निकाली जाती है. यह परंपरा करीब 150 सालों से चली आ रही है. इस शोभायात्रा को देखने के लिए आस-पास के इलाकों से लोग आते हैं|
शोभायात्रा की खास बातें अष्टमी को करैहापारा के लोग चंदन काष्ठ से बनी हनुमान जी की मूर्ति को रामटेकरी मंदिर से ले जाते हैं. करैहापारा में मूर्ति की विशेष पूजा की जाती है. रामनवमी की रात को पालकी में सजाकर हनुमान जी की मूर्ति को शोभायात्रा निकाली जाती है. तड़के चार बजे यह शोभायात्रा रामटेकरी मंदिर में खत्म होती है|
मान्यता है कि रामनवमी के दिन भगवान राम के जन्म के समय हनुमान जी उनके पास नहीं थे. इसलिए हर साल रामनवमी पर रामटेकरी मंदिर से हनुमान जी की शोभायात्रा निकाली जाती है. इसके बाद हनुमान जी फिर मंदिर में विराजमान हो जाते हैं. राम नवमी, भगवान राम के जन्म का जश्न मनाने का त्योहार है. यह त्योहार हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है|



