
अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर। महान साहित्य मनीषी, इतिहासकार एवं लोकचिंतक बाबू प्यारेलाल गुप्त जी की 134वीं जन्म जयंती अवसर पर रतनपुर में आयोजित आंचलिक कवि सम्मेलन में काव्य की ऐसी गंगा बही कि श्रोताओं के अंतस भिगो उठे। भादो माह के सूखे वातावरण को कवियों की काव्य वर्षा ने हरियाली में बदल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में बिलासपुर की प्रसिद्ध कवियत्री पूर्णिमा तिवारी ने अपने मधुर गीतों और ग़ज़लों से ऐसा समां बांधा कि पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। इसके बाद एक के बाद एक आंचलिक कवि मंच पर आते गए और अपनी काव्यधारा से श्रोताओं को रसविभोर करते रहे।

इस अवसर पर मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए बिलासपुर के सुप्रसिद्ध कवि जगतारन डहरे, श्रीकृष्ण भावधारा से जुड़े मशहूर गीतकार व गायक मदन सिंह ठाकुर, वरिष्ठ कवि विजय कुमार गुप्ता, जयरामनगर से आए छत्तीसगढ़ी के समर्थ कवि दशरथ मतवाले, कोटमी सुनार से पधारे सशक्त हस्ताक्षर व्यास सिंह गुमसुम, युवा कवि विपुल तिवारी, संवेदनशील कवियत्री ज्योति श्रीवास, मशहूर गीतकार गया प्रसाद साहू ‘रतनपुरिहा’, कविता संग्रह सुनहरा आसमान के रचयिता चंद्रप्रकाश साहू, युवा कवि मोहित साहू, रतनपुर के वरिष्ठ कवि काशीराम साहू, गीतकार डा. राजेन्द्र कुमार वर्मा ‘दीपक’, तथा कवि रामानंद यादव, रामरतन भारद्वाज, दिनेश पांडेय, रामेश्वर सिंह शांडिल्य, प्रमोद कश्यप, ब्रजेश श्रीवास्तव आदि ने गीत, ग़ज़ल, मुक्तक और छत्तीसगढ़ी काव्य रचनाओं से श्रोताओं को रस-मग्न कर दिया।

आंचलिक कवि सम्मेलन का संचालन संवेदनशील कवियत्री ज्योति श्रीवास मैम ने अपनी प्रभावी शैली से किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
विशेष उपस्थिति
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ इतिहासकार डा. रमेन्द्र मिश्र, वरिष्ठ पुरातत्ववेत्ता डा. जी. एल. रायकवार, शिक्षाविद् शंकर लाल पटेल, विशिष्ट अतिथि डा. सुनील जायसवाल (व्यवस्थापक, सरस्वती शिशु मंदिर), प्राचार्य मुकेश श्रीवास्तव, लेखिका श्रीमती अनुसुईया गुप्ता, शिक्षाविद् अनिल शर्मा, बलराम पांडेय, राकेश निर्मलकर, भानुप्रताप कश्यप, लक्ष्मी प्रसाद कश्यप, सर्वज्ञ श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी नागरिक उपस्थित रहे।
धन्यवाद ज्ञापन
अंत में बाबू प्यारेलाल गुप्त सृजन पीठ के अध्यक्ष डा. राजेन्द्र कुमार वर्मा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजनों से क्षेत्र की नई प्रतिभाओं को मंच मिलता है और साहित्य समाज को जोड़ने का काम करता है।



