
अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर। नगर पालिका रतनपुर की लापरवाही और संवेदनहीनता अब चरम पर पहुंच चुकी है। शहर के खंडोबा मंदिर और दुलहरा तालाब के आसपास रहने वाले लोग इस समय नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। कारण यह है कि नगर पालिका के कर्मचारी मरे हुए मवेशियों के शवों को कचरा गाड़ी में भरकर मोहल्लों के सुनसान इलाकों में फेंक कर चले जाते हैं। शवों के सड़ने से क्षेत्र में बदबू और सड़ांध फैल रही है, जिससे लोगों का गली में निकलना तक मुश्किल हो गया है।
सुनसान मोहल्लों में होता है गुपचुप ‘शव निस्तारण’
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह काम अक्सर तब किया जाता है, जब मोहल्ला सुनसान रहता है। कचरा गाड़ी आती है और मवेशियों के शवों को झाड़ियों या खाली मैदान में डालकर चली जाती है। धीरे-धीरे वहां सड़ांध फैलने लगती है और मच्छर-मक्खियों का अंबार लग जाता है। यह न केवल पर्यावरण को दूषित कर रहा है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
स्थानीय लोगों का आक्रोश – “बच्चों की तबीयत बिगड़ रही, सांस लेना मुश्किल”
क्षेत्र के निवासियों ने बताया कि कई बार नगर पालिका से शिकायत की गई लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
एक स्थानीय बुजुर्ग ने गुस्से में कहा—
“ये इंसानियत है या हैवानियत? बच्चों की तबीयत खराब हो रही है, बदबू से जीना दूभर हो गया है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं!”
लोगों का कहना है कि बदबू के कारण घर में खाना खाना और आराम से बैठना भी मुश्किल हो गया है। कई लोग सांस की तकलीफ और संक्रमण से परेशान हो चुके हैं।
कानून का उल्लंघन कर रही पालिका
जानकारी के अनुसार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत मरे हुए जानवरों को खुले में फेंकना अपराध है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 268 के अनुसार यह Public Nuisance यानी सार्वजनिक उपद्रव है, जिसके लिए सजा का भी प्रावधान है।
इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार मरे जानवरों का निस्तारण केवल डीप बरीअल (गहरे गड्ढे में दफनाना) या इंसीनरेटर के जरिए किया जाना चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी — “अब सब्र का बांध टूट रहा है”
स्थानीय युवाओं और समाजसेवियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका ने इस गंभीर समस्या का समाधान तुरंत नहीं किया तो वे नगर पालिका कार्यालय का घेराव करेंगे और उग्र आंदोलन छेड़ेंगे।
मोहल्लेवासियों की प्रमुख मांगें
1. जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई हो।
2. मवेशियों के शवों के लिए वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था की जाए।
3. पूरे प्रभावित क्षेत्र की सफाई और सैनिटाइजेशन कराया जाए।
4. दोषी कर्मचारियों पर FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यह पहली बार नहीं है जब नगर पालिका रतनपुर की लापरवाही उजागर हुई हो। लेकिन इस बार लोगों का गुस्सा उबाल पर है। अगर प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो मामला बड़ा आंदोलन का रूप ले सकता है।



