अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर | जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और उत्कृष्ट परिणाम दिलाने के उद्देश्य से शुरू किए गए महत्वाकांक्षी अभियान ‘मिशन 90 प्लस’ पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, रतनपुर में कक्षा 12वीं की भौतिकी परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र बदलने और चुनिंदा छात्रों को पहले से पेपर उपलब्ध कराने जैसे गंभीर आरोपों ने इस योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गहरी चोट पहुंचाई है।
डीईओ के आदेश की अनदेखी
सूत्रों के मुताबिक, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा समय सारणी में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि प्रश्नपत्रों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं होगा। इसके बावजूद 22 सितंबर को आयोजित परीक्षा में मानक प्रश्नपत्र के स्थान पर विद्यालय स्तर पर अलग प्रश्नपत्र छात्रों को दिया गया। यह कदम न केवल आदेश की अवहेलना है बल्कि गोपनीयता नियमों का भी खुला उल्लंघन माना जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर किनके दबाव या अनुमति से यह बदलाव किया गया?
‘मिशन 90 प्लस’ की विश्वसनीयता पर प्रहार
गौरतलब है कि 20 सितंबर को ही जिले में बड़े पैमाने पर एक सम्मान समारोह आयोजित कर शिक्षा विभाग ने ‘मिशन 90 प्लस’ की सफलता का जश्न मनाया था। ठीक उसके दो दिन बाद सामने आए इस कांड ने उस उपलब्धि पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह की अनियमितताएं जारी रहीं तो यह योजना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बनकर रह जाएगी।
छात्रों की आपबीती: “सिर्फ 30% पाठ्यक्रम पढ़ाया गया”
छात्रों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विद्यालय द्वारा अच्छे परिणाम का दबाव बनाकर चुनिंदा छात्रों को परीक्षा से पूर्व भौतिकी का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। वहीं अधिकांश छात्रों का आरोप है कि पूरे शैक्षणिक सत्र में पाठ्यक्रम का मात्र 30% भाग ही पढ़ाया गया।
“सिर्फ 5 अध्याय पढ़ाए गए, प्रैक्टिकल कार्य भी नाम मात्र का हुआ। ऐसे में हमसे पूरे पाठ्यक्रम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?” — छात्रों की पीड़ा
शिक्षक रौनित विश्वकर्मा पर ‘ऊंचे संपर्क’ का आरोप
इस पूरे मामले में भौतिकी व्याख्याता रौनित विश्वकर्मा पर सीधे आरोप लगे हैं। छात्रों ने दावा किया है कि उनके “ऊंचे संपर्क” के चलते प्रशासन उनकी मनमानी पर आंखें मूंदे बैठा है। जब शिक्षक से सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया—
“यदि अन्य अध्याय पढ़ाए गए हैं तो प्रश्नपत्र बदला जा सकता है।”
यह बयान न केवल शिक्षा विभाग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है बल्कि छात्रों की मेहनत और निष्पक्षता पर भी गहरी चोट करता है।
अब उठ रहे बड़े सवाल
- क्या कलेक्टर इस गंभीर मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करेंगे?
- डीईओ के आदेश की अवहेलना करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?
- क्या ‘मिशन 90 प्लस’ के दावों की सच्चाई की जांच होगी या यह केवल दिखावा साबित होगा?
- मेहनती और ईमानदार छात्रों के साथ हुए अन्याय की भरपाई कैसे होगी?
अभिभावकों और छात्रों की निगाहें प्रशासन पर
यह घटना अब केवल एक विद्यालय का मामला नहीं रह गया है, बल्कि पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गहरा प्रश्नचिह्न बन गई है। अभिभावक और छात्र अब जिला प्रशासन, विशेषकर कलेक्टर से कड़ी कार्रवाई और ठोस कदमों की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
“यदि इस तरह की गड़बड़ियां होती रहीं तो मेहनती छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।” — चिंतित अभिभावक
👉 यह कांड अब जिला प्रशासन के लिए सिर्फ परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि शिक्षा की साख बचाने की कड़ी परीक्षा बन चुका है।



