अमित दुबे बुलंद टाइम रतनपुर से विशेष रिपोर्ट:-
रतनपुर। चारों युगों की बस्ती और दक्षिण कौशल की प्राचीन राजधानी रतनपुर अपने 800 वर्षों के ऐतिहासिक गौरव के लिए प्रसिद्ध है। यह नगर न केवल छत्तीसगढ़ की धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ 200 से अधिक प्राचीन मंदिर और लगभग 150 से अधिक ऐतिहासिक तालाबों की उपस्थिति इसे “जीवंत पुरातत्व नगर” के रूप में पहचान दिलाती है। किंतु वर्तमान में रतनपुर की इस धरोहर की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।
केंद्र संरक्षित स्मारक और पुरातत्व की उपेक्षा
गजट नोटिफिकेशन के अनुसार रतनपुर किला एवं उसके आसपास के कई संरचनाएँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), भारत सरकार के अधीन केंद्र संरक्षित स्मारक घोषित हैं। वहीं प्रसिद्ध महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ शासन के राज्य पुरातत्व विभाग के अधीन आता है।
इतिहास साक्षी है कि रतनपुर में मुस्लिम शासनकाल की भी अनेक धरोहरें मौजूद हैं — जिनमें शहीद मूसे ख़ां का मजार प्रमुख है। परंतु, आश्चर्य की बात यह है कि इस मजार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण रायपुर मंडल द्वारा डिप्रोटेक्ट कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है।

बिस्दूरिया मंदिर का संरक्षण अधूरा, पुरातत्व विभाग मौन
रतनपुर का बिस्दूरिया मंदिर धार्मिक, स्थापत्य और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग 13 वर्ष पूर्व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण रायपुर मंडल के तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद श्री प्रवीण मिश्रा द्वारा इस मंदिर का “प्लेन प्रोटेक्शन” कार्य कराया गया था।
लेकिन उसके बाद से आज तक किसी भी अधिकारी ने इस मंदिर के संरक्षण या मरम्मत की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। मंदिर की दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, और छतों पर झाड़ियाँ उग आई हैं।
विधायक श्री अटल श्रीवास्तव ने उठाई आवाज
कोटा विधायक श्री अटल श्रीवास्तव ने इस विषय पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली को पत्र लिखकर तत्काल संरक्षण कार्य प्रारंभ करने की मांग की है।

इसके साथ ही नगर के इंजीनियर शिव मोहन बघेल, होरीलाल गुप्ता, बलराम पांडे, विनय पांडे, प्रहलाद कश्यप, बसंत यादव, राजेश शर्मा, संजय यादव सहित कई पुरातत्व प्रेमियों ने रायपुर पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।
चार महीने बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
ज्ञापन सौंपे जाने के चार महीने बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। इससे स्थानीय नागरिकों और पुरातत्व प्रेमियों में गहरी निराशा व्याप्त है।
मंदिर ट्रस्ट ने उठाया पहल का कदम
श्री महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट ने इस स्थिति को देखते हुए बिस्दूरिया मंदिर के संरक्षण हेतु 10 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की है। ट्रस्ट ने पुरातात्विक विधि से — चूना, सुरखी एवं पारंपरिक तकनीक का उपयोग कर मरम्मत की योजना बनाई है।
लेकिन इसके विपरीत कुछ लोगों द्वारा निजी कब्जे के उद्देश्य से सीमेंट और ईंट का उपयोग कर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जो पुरातत्व संरक्षण नियमों का उल्लंघन है।
नगरवासियों में रोष और प्रशासन से सवाल
रतनपुर के जागरूक नागरिकों ने कहा कि यह नगर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत पुरातात्विक विरासत है, जिसकी अनदेखी किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
पुरातत्व प्रेमियों का कहना है कि चूना-सुरखी की जगह सीमेंट से मरम्मत करना मंदिर की मौलिक संरचना को नष्ट कर देगा।
नगरवासी अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य सरकार से मांग कर रहे हैं कि तत्काल विशेषज्ञों की टीम भेजकर बिस्दूरिया मंदिर का संरक्षण कार्य शुरू कराया जाए।
रतनपुर की विरासत की पुकार
दक्षिण कौशल की यह नगरी आज भी अपने इतिहास और आस्था के अद्भुत संगम के लिए जानी जाती है। किंतु यदि जल्द ही संरक्षण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, तो बिस्दूरिया जैसे अनमोल मंदिर इतिहास के पन्नों में गुम हो जाएंगे।
नगर के बुद्धिजीवी और सामाजिक संगठन एक स्वर में कह रहे हैं —
“रतनपुर की धरोहरों को बचाइए, यही हमारी पहचान है।”



