अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर। धर्मनगरी रतनपुर में इस वर्ष भी यादव समाज द्वारा परंपरागत हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्ति के साथ गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया। दीपावली के अगले दिन संपन्न इस पर्व में नगर के यादव समाज के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की। पूजा-अर्चना का कार्य पंडित अश्विनी दुबे जी के द्वारा पूर्ण विधि-विधान से सम्पन्न हुआ। पूरे आयोजन स्थल पर “गोवर्धन महाराज की जय” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष गूंजते रहे।
पौराणिक कथा से प्रेरित गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्रदेव के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाने की पौराणिक कथा से जुड़ी है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस दिन भक्त लोग गोवर्धन पर्वत का प्रतीक स्वरूप गोबर से पर्वत बनाकर उसकी पूजा करते हैं और अन्नकूट के रूप में विविध व्यंजनों का भोग लगाते हैं।

पूजा-अर्चना और पारंपरिक विधियाँ
रतनपुर में यादव समाज के सदस्यों द्वारा गोवर्धन पर्वत का प्रतीक गोबर से बनाकर उसे फूलों, दीपों और रंगोली से सजाया गया। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। पूजा के दौरान दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और मिठाइयों से अभिषेक किया गया। गाय और बैलों की पूजा कर उन्हें तिलक लगाकर गुड़ और चारा खिलाया गया।
पंडित अश्विनी दुबे जी ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजा कराते हुए उपस्थित जनों को गोवर्धन पूजा के महत्व और उसकी पौराणिक कथा के बारे में बताया।

भक्ति और सामूहिकता का वातावरण
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में अद्भुत भक्ति भावना देखने को मिली। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजकर पूजा में सम्मिलित हुईं। भक्ति गीतों और भजन कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बन गया। समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने युवा पीढ़ी से इस परंपरा को आगे बढ़ाने की अपील की।
समाज के गणमान्य रहे उपस्थित
इस अवसर पर यादव समाज के प्रमुख सदस्य—मनबोध यादव, शिव यादव, बसंत यादव, डी.सी. यादव, कन्हैया यादव, राजा यादव, देवनारायण यादव, संतोष यादव, राजेश यादव, मनोज यादव, सुनीता यादव, शीलू यादव, चमेली यादव, पूनम यादव, सपना यादव, ईश्वरी यादव, सकुन गुप्ता, रामेश्वरी जैसवाल, किरण साहू, सरिता कश्यप और राधा सोनी—विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर गोवर्धन महाराज की परिक्रमा की और भगवान श्रीकृष्ण से समाज की उन्नति, सुख-समृद्धि और एकता की प्रार्थना की।
भंडारे का हुआ आयोजन
पूजा के पश्चात प्रसाद वितरण और सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें नगरवासियों ने श्रद्धापूर्वक भोजन ग्रहण किया। पूरा आयोजन सौहार्द और एकजुटता का संदेश देता हुआ सम्पन्न हुआ।



