अमित दुबे की रिपोर्ट:-
रतनपुर। प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं अ जा-क (अनुसूचित जाति आयोग) के नवनियुक्त अध्यक्ष संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज की कन्याओं के संबंध में की गई आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी के विरोध में आज रतनपुर में सरयूपारी ब्राह्मण सभा ने तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। समाज के प्रतिनिधिमंडल ने थाने पहुंचकर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की मांग करते हुए औपचारिक प्राथमिक (FIR) दर्ज कराई।
बताया जाता है कि संतोष वर्मा ने एक बयान में कहा था कि “जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान में ना दे या उससे संबंध ना बनाएं, तब तक आरक्षण का लाभ जारी रहना चाहिए।” इस कथन ने पूरे ब्राह्मण समाज को उद्वेलित कर दिया है। समाजजनों का कहना है कि यह टिप्पणी न सिर्फ ब्राह्मण कन्याओं के सम्मान को ठेस पहुँचाती है बल्कि महिलाओं की गरिमा और सामाजिक सौहार्द के भी विपरीत है।

ब्राह्मण सभा के पदाधिकारियों का कहना है कि यह बयान समाज में द्वेष, नफरत और वर्गभेद को बढ़ावा देने वाला है। महिलाओं के सम्मान और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए ऐसी टिप्पणी करने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है।
संगठन ने आरोप लगाया कि इस तरह की ओछी बयानबाजी से समाज के बीच तनाव पैदा हो सकता है और यह संविधान प्रदत्त समानता तथा महिलाओं के सम्मान का खुला उल्लंघन है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति को अपने शब्दों की मर्यादा और प्रभाव का ध्यान रखना चाहिए।
आज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में सरयू पा रिन ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष बलराम पांडे, राजेंद्र मिश्रा, राजेश शर्मा, महंत दिव्याकांत जी महाराज, ओमप्रकाश दुबे, शिवानंद पांडे, कृष्णकांत शर्मा, राजेंद्र दुबे, अजय दुबे सहित समाज के अनेक वरिष्ठ सदस्य एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सभा ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे समाज को न्याय मिल सके और भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी भी समाज की बेटी या स्त्री के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।
ब्राह्मण समाज की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती है तो वह व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होगा।




