अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर। सनातन धर्म की अखंड परंपरा, भक्ति आंदोलन के महान आचार्य और समाज सुधार के प्रखर प्रवक्ता जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज की जयंती के पावन अवसर पर धार्मिक नगरी रतनपुर एक बार फिर आध्यात्मिक आलोक से जगमगाने जा रही है।अखिल भारतीय संत समिति, छत्तीसगढ़ प्रांत के तत्वावधान में 10 जनवरी से नगर के श्री सिद्ध विनायक मंदिर परिसर में दो दिवसीय विराट संत सम्मेलन एवं जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। आयोजन की तैयारियाँ जोर-शोर से अंतिम चरण में हैं।
रामानंदाचार्य महाराज ने अपने जीवन और उपदेशों के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया कि—
“धर्म का सार करुणा, समरसता और सेवा है।”
उनकी इसी विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से देशभर से संत-महात्मा, आचार्य और धर्मगुरु रतनपुर पहुँचेंगे तथा सनातन संस्कृति, भक्ति परंपरा और सामाजिक समरसता पर मार्गदर्शन देंगे।



दिव्यकान्त शर्मा
(आयोजन से जुड़ी जानकारी एवं उद्देश्य पर वक्तव्य)
महोत्सव की विशेष गरिमा इस बात से और बढ़ जाएगी कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। साथ ही राष्ट्रीय स्तर के संत, अखिल भारतीय संत समिति के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति संभावित है। आयोजन समिति का कहना है कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को धर्म, संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ
ध्वज पूजन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
संत सम्मेलन में प्रवचन एवं आध्यात्मिक संवाद
समाज में समरसता, नैतिकता और सेवा भावना पर मार्गदर्शन
भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
समापन अवसर पर महाप्रसाद वितरण
कार्यक्रम का विस्तृत स्वरूप
आयोजन समिति के अनुसार पहले दिन पूर्वाह्न 10 बजे संत सम्मेलन का शुभारंभ होगा। दोपहर 12 से 2 बजे तक संतों का अधिवेशन आयोजित किया जाएगा, जबकि शाम को भक्ति संध्या के माध्यम से श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होंगे।
दूसरे दिन प्रातःकालीन पूजा-अर्चना के उपरांत संतों के प्रवचन होंगे और महाप्रसाद वितरण के साथ महोत्सव का विधिवत समापन किया जाएगा।
राधेश्याम महाराज
(सनातन परंपरा एवं जयंती महोत्सव के महत्व पर विचार)
आयोजन समिति ने बताया कि रतनपुर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरती, जो सदियों से देवी उपासना और संत परंपरा की साक्षी रही है, एक बार फिर सनातन चेतना से देदीप्यमान होगी। इस महोत्सव के माध्यम से भक्ति, सेवा, सद्भाव और राष्ट्रभावना का संदेश दूर-दूर तक पहुँचेगा।
श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर इस ऐतिहासिक और पुण्य आयोजन के साक्षी बनें।



