अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर/कोटा।दुलहरी तालाब के पार खुलेआम संचालित हो रहा अवैध पोल्ट्री फार्म अब सिर्फ अतिक्रमण का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता, संदिग्ध संरक्षण और कानून की कमजोर होती पकड़ का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। वर्षों से तालाब की शासकीय भूमि पर कब्जा जमाए इस अवैध निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दी।
तालाब जैसी सार्वजनिक और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील संपत्ति पर अवैध निर्माण होना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि जल संरक्षण और जनहित पर भी सीधा प्रहार है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
नोटिस जारी, कार्रवाई नदारद
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि रतनपुर तहसीलदार द्वारा स्वयं इस अवैध पोल्ट्री फार्म को लेकर नोटिस जारी किया गया था और बेदखली का आदेश भी पारित हुआ। आदेश में स्पष्ट रूप से अतिक्रमण हटाने की बात कही गई, लेकिन आदेश जारी होने के बाद आज तक न तो पोल्ट्री फार्म हटाया गया और न ही किसी प्रकार की सख्ती देखने को मिली। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब आदेश प्रशासन का है, तो उसका पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी है?

प्रशासनिक संरक्षण की आशंका गहराई
लगातार शिकायतों और आदेशों के बावजूद कार्रवाई न होना इस ओर इशारा करता है कि कहीं न कहीं इस अवैध पोल्ट्री फार्म को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि यही अतिक्रमण किसी आम गरीब या कमजोर व्यक्ति द्वारा किया गया होता, तो अब तक बुलडोजर चल चुका होता। ऐसे में यह दोहरा मापदंड क्यों?
SDM कोटा और तहसीलदार कटघरे में
मामले में कोटा SDM और रतनपुर तहसीलदार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जनता पूछ रही है कि क्या उच्च अधिकारियों की जानकारी के बिना ऐसा संभव है? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं, और यदि जानकारी नहीं है तो यह गंभीर लापरवाही नहीं तो और क्या है?

पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर खतरा
तालाब के समीप पोल्ट्री फार्म का संचालन न केवल अवैध है, बल्कि इससे गंदगी, बदबू और संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। इससे आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और तालाब का प्राकृतिक स्वरूप भी नष्ट हो रहा है।
अब जवाब चाहता है रतनपुर
दुलहरी तालाब के पार खड़ा यह अवैध पोल्ट्री फार्म आज प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा बन चुका है। सवाल साफ है—क्या कानून सबके लिए बराबर है या कुछ खास लोगों के लिए नियम अलग हैं? यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला जनआंदोलन और उच्चस्तरीय जांच की मांग की ओर बढ़ सकता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी चुप्पी तोड़कर कानून का राज स्थापित करता है या फिर यह अवैध पोल्ट्री फार्म यूं ही प्रशासनिक संरक्षण की छाया में फलता-फूलता रहेगा।



