अमित दुबे की रिपोर्ट:-
कोटा। कोटा विकासखंड का शिक्षा विभाग इन दिनों गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोपों को लेकर चर्चा में है। शिक्षकों के वेतन से काटी गई आयकर (इनकम टैक्स) की राशि को समय पर आयकर विभाग में जमा न कर अन्य खातों में ट्रांसफर किए जाने का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगभग 90 लाख रुपये की राशि में हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि शिक्षकों से काटी गई टैक्स की राशि विभागीय खाते से आयकर विभाग में जमा न होकर कथित रूप से अन्य निजी खातों में भेजी गई। शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुंचने के बाद मामला उजागर हुआ। आरोप है कि ब्लॉक शिक्षा कार्यालय में पदस्थ एक चपरासी, जो कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य भी देख रहा था, उसके खाते में पिछले दिनों करीब 25 लाख रुपये और हाल ही में लगभग 5 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।

सूत्रों का दावा है कि शेष राशि भी विगत वर्षों में 8 से 10 अलग-अलग खातों में भेजी गई। यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं तो यह मामला सामान्य त्रुटि नहीं बल्कि सुनियोजित वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आएगा। कलेक्टर के निर्देश पर विजय तांडे, जिला शिक्षा अधिकारी ने लेखाकार नवल सिंह पैकरा और चपरासी देवेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया है। साथ ही ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नरेंद्र मिश्रा के विरुद्ध तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है।

हालांकि, कार्रवाई के बाद भी कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। सूत्रों के अनुसार कथित रूप से करीब 80 लाख रुपये की अनियमितता पूर्व वर्षों में भी हुई थी, जब वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी उसी ब्लॉक में पदस्थ थे। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि उस समय वित्तीय निगरानी व्यवस्था कैसे काम कर रही थी। यदि लेन-देन में गड़बड़ी हुई, तो क्या उस अवधि की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक से जानकारी चाही गई तो उन्होंने इस पूरे प्रकरण से अनभिज्ञता जाहिर की। करोड़ों के सरकारी लेन-देन में कथित गड़बड़ी और वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी न होना प्रशासनिक प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

अब यह मामला केवल दो कर्मचारियों तक सीमित नहीं माना जा रहा। विभागीय स्वीकृति की प्रक्रिया, बैंक स्तर पर ट्रांजैक्शन की निगरानी, आडिट और लेखा परीक्षण की भूमिका—इन सभी पहलुओं की जांच आवश्यक मानी जा रही है।
शिक्षकों ने स्पष्ट कहा है कि उनकी मेहनत की कमाई से काटी गई आयकर राशि के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
फिलहाल निगाहें जांच टीम पर टिकी हैं कि वह इस मामले में वास्तविक जिम्मेदारों तक पहुंचेगी या कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रह जाएगी। कोटा शिक्षा विभाग का यह प्रकरण प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन की कसौटी बन गया है।



