अमित दुबे की रिपोर्ट
मस्तुरी।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बुढीखार में जनसहयोग से अतिरिक्त कक्ष का निर्माण सामुदायिक विकास और शिक्षा के प्रति समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। यह पहल न केवल स्कूल के भौतिक ढांचे को मजबूत करती है, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज की जागरूकता और जिम्मेदारी को भी दर्शाती है।
विद्यालय के प्राचार्य कांशीराम रजक ने बताया कि जब समुदाय, अभिभावक, शिक्षक और जनप्रतिनिधि एकजुट होकर स्कूल के विकास में योगदान देते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था को नई ऊर्जा देता है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से निर्मित यह अतिरिक्त कक्ष विद्यार्थियों के लिए बेहतर अध्ययन वातावरण तैयार करेगा और भविष्य में शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ बनाएगा।
ग्राम पंचायत बुढीखार के युवा सरपंच डॉ. दीपक लहरे ने इस पहल को सामुदायिक एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि अक्सर सरकारी योजनाओं के अधूरे कार्यों को जनसहयोग से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस निर्माण कार्य में गांव के हर वर्ग—महिलाओं, पंचों, शाला प्रबंधन समिति और जनप्रतिनिधियों—ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी ने इस कार्य को नई दिशा दी है, जिससे पूरे स्कूल की तस्वीर बदल गई है।
सरपंच लहरे ने आगे कहा कि यह पहल न केवल बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएगी, बल्कि समाज में स्कूल के प्रति अपनापन और जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ाएगी। उन्होंने इसे अपने जीवन का एक यादगार क्षण बताते हुए कहा कि शिक्षा के इस कार्य में योगदान देना गर्व की बात है।
स्कूल परिसर में हरियाली, स्वच्छता और व्यवस्थित वातावरण भी प्राचार्य कांशीराम रजक के प्रयासों का परिणाम है, जिसकी सराहना ग्रामीणों द्वारा की जा रही है। उनका यह प्रयास न केवल आधारभूत संरचना को मजबूत करता है, बल्कि बच्चों के लिए सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल भी तैयार करता है।
इस निर्माण कार्य को सफल बनाने में प्राचार्य कांशीराम रजक, बीरबल थवाईत, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य रामकुमार साहू, भारत, बालमुकुंद वैष्णव, दीपक गुप्ता, अनिल, सुनील थवाईत सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सतकली बावरे और ज्वाला प्रसाद बंजारे का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
ग्रामवासियों का मानना है कि इस प्रकार की सामूहिक पहल भविष्य में भी विकास कार्यों को गति देगी और बुढीखार को एक आदर्श ग्राम के रूप में स्थापित करेगी।



