लाल पानी-लाल हवा में घुटती ज़िंदगी, बीएसपी के खिलाफ जनआक्रोश”
नारायणपुर। रावघाट खदान क्षेत्र में अब असंतोष खुलकर जनआंदोलन में बदलता नजर आ रहा है। खनन से प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि बीएसपी ने विकास के नाम पर उनकी जमीन ली, लेकिन बदले में सिर्फ प्रदूषण, बीमारी और बेरोजगारी दी। इलाके में “लाल पानी, लाल हवा और लाल माटी” अब लोगों की मजबूरी बन चुकी है।रावघाट खदान क्षेत्र में अब हालात सिर्फ असंतोष तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह एक बड़े जनविस्फोट का रूप ले चुका है। जिन ग्रामीणों की ज़मीन, जल और जंगल पर खनन का बोझ डाला गया, आज वही लोग खुद को ठगा हुआ और उजड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।“लाल पानी, लाल हवा और लाल माटी”—यह सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि रावघाट के ग्रामीणों की हकीकत बन चुकी है। खदान से निकलने वाली धूल और प्रदूषण ने जीवन को प्रभावित किया, लेकिन इसके बदले में जो वादे किए गए थे—रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य—वे अब तक सिर्फ कागज़ों में ही सीमित हैं।राजाराव बूढ़ादेव गोद ग्राम श्रमिक विकास समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो 20 अप्रैल 2026 से खदान का काम बंद कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा,समिति के अनुसार, 31 मार्च तक समस्याओं के समाधान का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन समयसीमा बीतने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे ग्रामीणों का भरोसा पूरी तरह टूट गया है।
न स्कूल बना, न अस्पताल,ना रोजगार
सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का है। केसीसीएल के माध्यम से स्थानीय युवाओं को काम देने का वादा किया गया था, लेकिन तीन साल बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।वहीं शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति भी बदहाल है—अब तक न स्कूल बना, न अस्पताल, जिससे ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।इसके अलावा, लौह अयस्क परिवहन के लिए दर तय नहीं होने से स्थानीय ट्रांसपोर्टर भी आर्थिक संकट में हैं और अब आंदोलन में शामिल होने की तैयारी में हैं।समिति ने दो टूक कहा है “अब आश्वासन नहीं, आर-पार की लड़ाई होगी।”साथ ही चेतावनी दी गई है कि आंदोलन के दौरान किसी भी स्थिति के लिए बीएसपी प्रबंधन और खनन विभाग जिम्मेदार होंगे।
बीएसपी के वादे जमीन पर नजर नहीं आते-डॉ बेनर्जी
इस पूरे मामले में स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार डॉ अभिषेक बेनर्जी बताते है कि रावघाट खदान क्षेत्र में हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं विकास के नाम पर यहां के ग्रामीणों को प्रदूषण, बीमारी और बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। लाल पानी और दूषित हवा ने लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है,भिलाई स्टील प्लांट ने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के जो वादे किए गए थे, वे अब तक जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं।स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है प्रशासन और संबंधित कंपनी को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान करना चाहिए।



