सुरेश सोनी
नारायणपुर जिले के कुतुल जो कभी नक्सलियों की राजधानी हुआ करती थी, जहां कई दशकों के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला, कभी खौफ के साए में जीने वाला कुतुल जहां कभी डर था वहां अब मेला मडई एक नई कहानी को दर्शा रहा था, नक्सल मुक्त होने के बाद एक बदलाव की सुंदर तस्वीर नजर आई, आजादी के बाद पहली बार यहां दो दिवसीय दिन रात मेले का आयोजन हुआ जहां आदिवासी लोक संस्कृति की चमक नजर आई, जो दृश्य हम दिखा रहे थे वह पूरी तरह बदल चुका था, लोग जमकर मेले आनंद उठा रहे थे,



