अमित दुबे की रिपोर्ट
बिलासपुर, 18 जून। मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं की रोकथाम, पीड़ितों को कानूनी सहायता एवं पुनर्वास से जोड़ने तथा शासन, प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शिखर युवा मंच, बिलासपुर द्वारा दीप रॉयल होटल, मंगला चौक में एक दिवसीय चर्चा-परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
“मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी के मुद्दे पर एक दिवसीय चर्चा-परिचर्चा : कानूनी सहायता एवं पुनर्वास” विषयक इस कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के सचिव अनिल कुमार चौहान मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के शिकार व्यक्तियों को संविधान एवं विभिन्न कानूनों के तहत अनेक अधिकार प्राप्त हैं तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उन्हें निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने लोगों से ऐसे मामलों की जानकारी समय पर संबंधित विभागों तक पहुंचाने और रोजगार के लिए बाहर जाने से पहले आवश्यक जानकारी प्राप्त करने की अपील की।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डी.आर. टंडन, डीएसपी बिलासपुर ने कहा कि मानव तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने नागरिकों से बाल श्रम, जबरन मजदूरी या किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस और प्रशासन को देने का आग्रह किया।
श्रम विभाग की ओर से उपस्थित विमल कुमार मिश्रा, लेबर इंस्पेक्टर बिलासपुर ने बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम, श्रमिकों के अधिकारों एवं शासन की पुनर्वास योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुक्त कराए गए श्रमिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने का प्रयास किया जाता है।
शिखर युवा मंच के डायरेक्टर भूपेश वैष्णव ने कहा कि मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी की रोकथाम केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज, पंचायतों, युवाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन मंच के सचिव धनंजय अनुपान ने किया। उन्होंने परिचर्चा की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न विभागों एवं सामाजिक संगठनों के बीच संवाद स्थापित कर एक प्रभावी सहयोग तंत्र विकसित करना है।
परिचर्चा के दौरान मानव तस्करी की पहचान एवं रोकथाम, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन, पीड़ितों को कानूनी सहायता, पुनर्वास, सरकारी योजनाओं तक पहुंच तथा समाज और प्रशासन की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही पंचायत स्तर पर पलायन पंजी का नियमित संधारण, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान, बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा, सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग तथा ग्राम स्तरीय विजिलेंस समितियों को सक्रिय करने जैसे सुझाव भी सामने आए।
कार्यक्रम में 35 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, लॉ स्टूडेंट्स, बंधुआ मजदूरी से मुक्त हुए सर्वाइवर, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिखर युवा मंच के सदस्य शामिल थे।
प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों और निरंतर जागरूकता के माध्यम से ही मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी मुक्त समाज के निर्माण, पीड़ितों को न्याय दिलाने तथा उनके सम्मानजनक पुनर्वास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
आयोजकों के अनुसार यह परिचर्चा विभिन्न विभागों एवं सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय और साझेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।




