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जनपद पंचायत के तत्कालीन तकनीकी सहायक ने इसका मूल्यांकन आखिर कैसे किया ये चर्चा का विषय है।
बुलंद टाइम्स न्यूज, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत उरमाल में विकास के दावों की पोल खोलती एक हैरान करने वाली और गंभीर अनियमितता सामने आई है। यहाँ वित्तीय वर्ष 2020-21 में
सार्वजनिक शौचालय निर्माण के नाम पर 3 लाख 50 हजार रुपये की राशि का आहरण (निकासी) तो धड़ल्ले से कर लिया गया, लेकिन आज तक जमीन पर एक ईंट भी नहीं रखी गई है।
कागजों में निर्माण, धरातल पर शून्य…
ग्रामीणों का आरोप है कि शासन द्वारा खुले में शौच से मुक्ति और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भेजी गई इस राशि का खुलेआम बंदरबांट किया गया है। आज स्थिति यह है कि कागजों में शौचालय बनकर तैयार हो चुका है और उसका भुगतान भी पूर्ण बताया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थल पर शौचालय का दूर-दूर तक कोई नामोनिःशान नहीं है।
ग्रामीणों का तंज: “शायद बर्फ का बना होगा, जो गर्मी में पिघल गया!”
इस बड़े भ्रष्टाचार और जिम्मेदारों की लचर कार्यशैली से आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा तंज कसा है। ग्रामीणों ने व्यंग्य करते हुए कहा—
ग्रामीणों का यह तंज स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जाँच और कार्रवाई की उठी मांग
एक तरफ जहाँ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है, वहीं मैदानी स्तर पर इस तरह की लापरवाही योजनाओं की सफलता पर बदनुमा दाग लगा रही है।
उरमाल ग्राम पंचायत के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि:
इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में निकाले गए 3 लाख 50 हजार रुपये के आहरण की फाईलों को खंगाला जाए।
इस वित्तीय अनियमितता और शासकीय राशि के गबन के लिए जिम्मेदार सरपंच, सचिव और संबंधित अमले पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और दोषियों पर कब गाज गिरती है।




