बुलंद टाइम्स न्यूज/अमित दुबे
रतनपुर। धार्मिक नगरी रतनपुर में हलषष्ठी पर्व श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। अपने पुत्रों एवं संतानों की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सुरक्षित जीवन की कामना को लेकर बड़ी संख्या में माताओं ने हलषष्ठी का निर्जला एवं पारंपरिक व्रत रखकर माता हलषष्ठी और भगवान बलराम की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। नगर के विभिन्न मंदिरों और पूजा स्थलों पर सुबह से ही महिलाओं की विशेष भीड़ देखने को मिली।
सुबह स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद महिलाओं ने व्रत का संकल्प लिया। इसके पश्चात दोपहर के समय पलाश, कांस, कुश सहित विभिन्न पारंपरिक पूजन सामग्रियों के साथ महिलाओं ने सामूहिक रूप से नगर के प्रतिष्ठित पुरोहितों के यहां पहुंचकर हलषष्ठी माता की पूजा-अर्चना की और व्रत की पावन कथा सुनी। पूजा के दौरान माताओं ने अपनी संतानों की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुखी जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना की।
मंदिरों में उमड़ी महिलाओं की भीड़…
हलषष्ठी पर्व के अवसर पर नगर के विभिन्न धार्मिक स्थलों एवं मंदिरों में भी महिलाओं की विशेष भीड़ देखने को मिली। विशेष रूप से मां महामाया मंदिर और भगवान बूढ़ा महादेव मंदिर में पहुंचकर महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक दर्शन-पूजन किया। माताओं ने अपनी संतानों की रक्षा, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए देवी-देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त किया।
हल से जोते खेत के अन्न का सेवन रहता है वर्जित…
हलषष्ठी व्रत में विशेष रूप से खान-पान के पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है। इस दिन हल से जोते गए खेत में उत्पन्न अनाज, फल एवं सब्जियों का सेवन वर्जित माना जाता है। व्रती माताएं परंपरा के अनुसार बिना हल से जोते प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली वस्तुओं का उपयोग करती हैं। इसमें विशेष रूप से पसहर का चावल तथा भैंस के दूध और दही का सेवन किया जाता है।
व्रत के दौरान माताओं ने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए भैंस के दूध, दही एवं पसहर के चावल आदि का उपयोग कर अपना व्रत पूर्ण किया। महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं भी दीं और परिवार की सुख-शांति के लिए मंगलकामना की।
भगवान बलराम के जन्मोत्सव से जुड़ा है पर्व…
नगर के प्रतिष्ठित पुरोहित पंडित गणेशदत्त तिवारी ने बताया कि हलषष्ठी का व्रत संतान की लंबी उम्र, सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम, जिन्हें बलदाऊजी के नाम से भी जाना जाता है, का जन्मोत्सव मनाया जाता है। भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र एवं प्रतीक हल होने के कारण इस पर्व में हल और कुश की विशेष पूजा की जाती है।
उन्होंने बताया कि हलषष्ठी पर्व कृष्ण जन्माष्टमी से दो दिन पूर्व भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस अवसर पर विशेष रूप से पुत्रवती माताएं अपनी संतानों की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुखी एवं समृद्ध जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं।
आस्था और परंपरा का अनूठा संगम…
रतनपुर में हलषष्ठी पर्व के दौरान नगर का धार्मिक वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ महिलाओं द्वारा किया गया सामूहिक पूजन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। माताओं की अटूट श्रद्धा और अपनी संतानों के प्रति प्रेम एवं समर्पण ने इस पावन पर्व को और भी विशेष बना दिया।
इस अवसर पर महिलाओं ने हलषष्ठी माता और भगवान बलराम से अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा सभी बच्चों के स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्रद्धा, विश्वास और मातृशक्ति के इस पावन पर्व ने रतनपुर की धार्मिक परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया।




