राजनांदगांव, 4 अक्टूबर। साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ राजनांदगांव पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। थाना सिटी कोतवाली पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने छह राज्यों में करीब 91 लाख 85 हजार रुपये की साइबर ठगी से जुड़े म्यूल अकाउंट मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जितेन्द्र पाण्डेय (34), निवासी रिसाली, जिला दुर्ग और हिमांशु निर्मलकर (22), निवासी कुरूद, जिला धमतरी के रूप में हुई है। इससे पहले पुलिस इस मामले में धनीराम सिन्हा (43), निवासी डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव को 3 अक्टूबर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज चुकी है।
ICICI बैंक खातों से हो रहा था रकम का लेन-देन
पुलिस के अनुसार, भारत सरकार के गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के समन्वय पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर ऐसे बैंक खातों की पहचान की गई, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को हासिल करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि कुछ ICICI बैंक खातों के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी से अर्जित करीब 91.85 लाख रुपये की राशि प्राप्त कर आगे हस्तांतरित की गई। पुलिस ने मामले में थाना सिटी कोतवाली राजनांदगांव में अपराध क्रमांक 611/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(4), 317(5) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया अपराध
विवेचना के दौरान पुलिस ने जितेन्द्र पाण्डेय और हिमांशु निर्मलकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में अपराध स्वीकार करने के बाद दोनों को 4 अक्टूबर को विधिवत गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर और नगर पुलिस अधीक्षक सत्यप्रकाश तिवारी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली निरीक्षक उपेन्द्र कुमार शाह तथा साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक विनय पम्मार के नेतृत्व में आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई थी।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से हासिल रकम को छिपाने, दूसरे खातों में भेजने या निकालने के लिए करते हैं। कई मामलों में अपराधी कमीशन या आर्थिक लालच देकर किसी व्यक्ति का बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं।
ठगी की रकम पहले म्यूल अकाउंट में जमा कराई जाती है और फिर उसे कई अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इससे रकम के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल बनाने का प्रयास किया जाता है।
पुलिस ने नागरिकों से की सावधानी बरतने की अपील
राजनांदगांव पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम इस्तेमाल करने के लिए न दें। कमीशन या बड़ी रकम के लालच में अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने से भी बचने की सलाह दी गई है।
पुलिस ने कहा कि साइबर अपराधी ऐसे खातों का इस्तेमाल गेमिंग और गैंबलिंग एप, फर्जी ट्रेडिंग एप, सेक्सटॉर्शन, डिजिटल अरेस्ट समेत विभिन्न प्रकार की ऑनलाइन ठगी में कर सकते हैं। खाता किराये पर देना, कमीशन पर उपलब्ध कराना या बेचना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में खाता धारक और म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कार्रवाई में इनकी रही भूमिका
इस कार्रवाई में निरीक्षक उपेन्द्र कुमार शाह, साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक विनय पम्मार, प्रशिक्षु उप निरीक्षक नितेश कुमार कर्ष, प्रधान आरक्षक जी. सिरिल कुमार, प्रधान आरक्षक अखिल अम्बादे तथा आरक्षक सेहल साहू और विकास केशरवानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।




