संवाददाता — ईश्वर सिंह प्रधान की रिपोर्ट
रतनपुर। जिला बिलासपुर की धर्मनगरी रतनपुर में विराजित मां महामाया देवी के प्रति आस्था प्रकट करने एवं सामाजिक एकता का संदेश देने के उद्देश्य से सर्व आदिवासी समाज, रतनपुर इकाई द्वारा 15 अक्टूबर को भव्य जोहार सेवा यात्रा का आयोजन किया जाएगा। यह यात्रा दोपहर 12 बजे रतनपुर के जूना शहर स्थित बादल महल से प्रारंभ होकर मां महामाया देवी मंदिर प्रांगण तक पहुंचेगी। यहां समाजजन अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कुलदेवी मां महामाया दाई को चुनरी अर्पित कर पूजा-अर्चना करेंगे तथा भोग अर्पित करेंगे।
आदिवासी समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं मां महामाया
सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों एवं समाज प्रमुखों ने बताया कि रतनपुर में विराजित मां महामाया देवी लंबे समय से स्थानीय आदिवासी समाज सहित संपूर्ण बिलासपुर जिले के आदिवासी समुदाय के लिए आस्था, भक्ति और शक्ति आराधना का प्रमुख केंद्र रही हैं। आदिवासी समाज मां महामाया दाई को अपनी कुलदेवी के रूप में मानता है और परंपरागत रूप से उनकी पूजा-अर्चना करता आया है।
समाज प्रमुखों के अनुसार, प्राचीन समय में रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर की पूजा-अर्चना, सेवा व्यवस्था एवं प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियों में स्थानीय मूल निवासी आदिवासी समाज के बैगा-भूमका की महत्वपूर्ण भूमिका हुआ करती थी। समाज की रूढ़ि-प्रथा एवं पारंपरिक मान्यताओं के अनुरूप कुलदेवी की सेवा-अर्जी और पूजन की व्यवस्था प्रचलित थी।
अपनी संस्कृति और परंपराओं को पुनर्जीवित करने की पहल
समाज प्रमुखों ने बताया कि वर्तमान समय में अपनी पारंपरिक व्यवस्थाओं और रीति-रिवाजों से बढ़ती दूरी को देखते हुए आदिवासी समाज अपनी प्राचीन परंपराओं, सभ्यता और संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से पूर्व में लिए गए निर्णय के अनुसार इस वर्ष भी जोहार सेवा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है।
यात्रा के माध्यम से समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने, पारंपरिक मान्यताओं को आगे बढ़ाने और सामाजिक एकजुटता का संदेश देने का प्रयास करेगा।
जिलेभर से समाजजन होंगे शामिल
15 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे बादल महल से पारंपरिक बाजे-गाजे के साथ निकलने वाली इस जोहार सेवा यात्रा में रतनपुर सहित बिलासपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों एवं ब्लॉकों से सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी, सामाजिक प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाजजन शामिल होंगे।
यात्रा मां महामाया देवी मंदिर प्रांगण में पहुंचकर पूजा-अर्चना, चुनरी अर्पण, सेवा-अर्जी एवं भोग अर्पण के साथ संपन्न होगी
जोहार सेवा यात्रा के माध्यम से सर्व आदिवासी समाज अपनी कुलदेवी मां महामाया दाई के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मान्यताओं को आगे बढ़ाने का संदेश देगा।




