सुरेश सोनी की रिपोर्ट :-
नारायणपुर। बस्तर संभाग में स्थायी शांति स्थापित करने और स्थानीय ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने आज नारायणपुर कलेक्टर के माध्यम से प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के नाम एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में यूनियन ने नक्सल संघर्ष के दौरान वर्षों से जेलों में बंद निर्दोष मूलवासियों तथा झीरम घाटी मामले में मृत्युदंड की सजा पाए 10 व्यक्तियों की तत्काल रिहाई की मांग उठाई है। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि बस्तर में शांति की पहल तभी सार्थक हो सकती है जब संघर्ष से प्रभावित आम ग्रामीणों को भी इसका लाभ मिले। सालों से झूठे या निराधार आरोपों में कैद आदिवासियों और उनके परिवारों की पीड़ा की अनदेखी करके बस्तर में कभी भी स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती।
ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित 5 सूत्रीय मांगें रखी गई हैं:
1. निर्दोष मूलवासियों की तत्काल रिहाई: नक्सल उग्रवाद के नाम पर बीते वर्षों में बड़ी संख्या में जिन निर्दोष मूलवासियों को निराधार आरोपों में जेल भेजा गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
2. झीरम मामले के 10 व्यक्तियों के मृत्युदंड पर रोक और रिहाई: वर्ष 2013 के झीरम घाटी हमले (जिसमें कांग्रेस के 29 नेताओं-कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी) में पिछले 13 वर्षों से जेल में बंद 10 व्यक्तियों को दिए गए मृत्युदंड पर तुरंत रोक लगाई जाए। यूनियन का कहना है कि जब सरकार मुख्य माओवादी नेतृत्व के साथ शांति वार्ता की मेज पर बैठ सकती है, तो इन 10 व्यक्तियों को मृत्युदंड देना पूरी तरह विरोधाभासी है। सरकार इनके लिए सभी कानूनी उपाय अपनाकर रिहाई सुनिश्चित करे।
3. शांति प्रक्रिया का दायरा बढ़े: सरकार और माओवादियों के बीच चल रही शांति वार्ता में केवल हथियार छोड़ने वालों को ही नहीं, बल्कि जेलों में बंद उन मूलवासियों को भी शामिल किया जाए जो मुख्यधारा में लौटकर अपने परिवारों के पास आना चाहते हैं।
4. अभियोजन वापसी प्रक्रिया में तेजी: सरकार द्वारा गठित समीक्षा समिति की ढीली कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए यूनियन ने मांग की है कि निर्दोष बंदियों के मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया जाए।
5. न्याय को बनाया जाए शांति का हिस्सा: बस्तर की शांति प्रक्रिया को केवल सशस्त्र नेतृत्व तक सीमित रखने के बजाय धरातल पर आम लोगों तक पहुँचाया जाए।
इस दौरान प्रमुख रूप से प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही, संभाग अध्यक्ष शिवा स्वर्णकार, गरियाबंद जिला अध्यक्ष मदनलाल साहू, नारायणपुर जिला अध्यक्ष रुबजी सलाम, बस्तर जिला अध्यक्ष रमेश गोयल के अलावा नरसिंह मंडावी, सूरज कुमार नेताम, सोमजी सलाम, श्यामलाल दुग्गा और जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों के परिवार के सदस्य उपस्थित थे। भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से इस गंभीर मानवीय और न्यायिक प्रश्न पर तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से कहा है कि बस्तर के ग्रामीणों को न्याय दिलाए बिना क्षेत्र में विकास और शांति की हर कोशिश अधूरी रहेगी।




