पत्थलगांव / तमता: जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड के तमता बालक छात्रावास अधीक्षक बुधनाथ भगत के खिलाफ भ्रष्टाचार, फर्जी नियुक्तियों और बच्चों के हक गबन करने के तमाम गंभीर सबूत और खुलासे सामने आने के बाद भी अब तक कार्रवाई न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहा है। एक तरफ जहां पूरा क्षेत्र आक्रोशित है, वहीं अब जिम्मेदार अधिकारियों, विशेषकर सहायक आयुक्त की संदिग्ध कार्यशैली पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।
सहायक आयुक्त की कार्यशैली पर गहराता संदेह
गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के मामलों में लिप्त होने के बाद भी अधीक्षक के खिलाफ ठोस विभागीय कार्रवाई का अभाव यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर पर्दे के पीछे कौन है जो इस रसूखदार अधीक्षक को बचा रहा है? स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों का सीधा सवाल है कि क्या आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला मुखिया यानी सहायक आयुक्त महोदय इन आरोपों से अंजान हैं या फिर किसी दबाव के चलते आंखें मूंदकर बैठे हैं? इस तरह की उदासीनता सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने जैसी प्रतीत होती है।
तमता की जनता पूछती है—आखिर क्यों हो रही है लीपापोती?
हफ्तों बीत जाने और मीडिया द्वारा चीख-चीख कर सबूत उजागर करने के बावजूद प्रशासन का मौन रहना कई बड़े सवाल खड़े करता है:
क्या शासन के नियम और कानून केवल आम जनता के लिए हैं, रसूखदारों के लिए नहीं?
जांच के नाम पर औपचारिकता निभाने वाले अधिकारियों को किसका शह प्राप्त है?
बच्चों के कंबल, मच्छरदानी और थाली-बर्तन का हक मारने वाले अधीक्षक पर विभागीय गाज क्यों नहीं गिर रही?
उग्र आंदोलन की चेतावनी: अब आर-पार की लड़ाई के मूड में ग्रामीण
धैर्य की सीमाएं लांघ चुकी तमता क्षेत्र की जनता और विभिन्न संगठनों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द से जल्द उक्त भ्रष्ट अधीक्षक को निलंबित कर उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया, तो तमता की जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और शासन की होगी।
जनता की हुंकार: अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन कुंभकर्णीय नींद से जागकर भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसता है या फिर जनता के उग्र आंदोलन का इंतजार करता है?




