अमित दुबे की रिपोर्ट
बिलासपुर। बुराई पर अच्छाई की विजय, धर्म की स्थापना और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देने वाला विजयादशमी का पर्व महामाया रेसीडेंसी कॉलोनी, कोनी, बिलासपुर में हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। दशहरा उत्सव के अवसर पर पूरी कॉलोनी भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आई। इस आयोजन में महिला, पुरुषों और बच्चों सहित बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी शामिल हुए और उत्सव की खुशियों को एक-दूसरे के साथ साझा किया।
मां महामाया की पूजा-अर्चना से हुआ शुभारंभ
दशहरा उत्सव का शुभारंभ मां महामाया की विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती के साथ किया गया। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। पूजा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ मां का आशीर्वाद प्राप्त किया।
नन्हे बाल कलाकारों ने जीवंत किया रामायण का प्रसंग
इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण नन्हे-मुन्ने बाल कलाकारों द्वारा भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और पवनपुत्र हनुमान जी के स्वरूपों का मनमोहक चित्रण रहा। बच्चों ने अपने आकर्षक वेशभूषा और भावपूर्ण प्रस्तुति से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। उनके दिव्य स्वरूपों ने रामायण की पावन स्मृतियों को ताजा कर दिया और श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह का संचार किया।
बाल कलाकारों की इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भगवान श्रीराम का आदर्श जीवन, माता सीता की मर्यादा, लक्ष्मण की निष्ठा और हनुमान जी की सेवा एवं समर्पण की भावना आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
भव्य झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
मां महामाया की पूजा एवं आरती के पश्चात भगवान श्रीराम और उनके परिवार के स्वरूपों के साथ झांकी निकाली गई। झांकी के दौरान श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक उत्साह का सुंदर संगम देखने को मिला। कॉलोनी के निवासियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई और इस आयोजन को यादगार बनाया।
उत्सव ने बढ़ाया सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश
महामाया रेसीडेंसी कॉलोनी में आयोजित दशहरा उत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने आपसी मेल-मिलाप, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश भी दिया। बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की सहभागिता ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी।
दशहरा हमें याद दिलाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, सत्य, धर्म और सदाचार का मार्ग अंततः विजय की ओर ले जाता है। भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत बनाने का संकल्प ही इस पर्व की वास्तविक सार्थकता है।
महामाया रेसीडेंसी कॉलोनी, कोनी में मनाया गया यह दशहरा उत्सव धार्मिक आस्था, बाल प्रतिभा और सामाजिक एकजुटता का सुंदर उदाहरण बना। उत्सव के उल्लास और भक्तिमय वातावरण ने कॉलोनीवासियों के मन में सुखद स्मृतियां छोड़ दीं।




