अमित दुबे की रिपोर्ट | बुलंद टाइम्स न्यूज़
कोटा। नगर पालिका क्षेत्र में प्रस्तावित तीव्रता कोल बेनिफिकेशन की कोल वाशरी परियोजना और रेलवे साइडिंग को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के उपाध्यक्ष आदित्य दीक्षित ने मोर्चा खोलते हुए नगर पालिका परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रस्तावित परियोजना के संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने की कार्रवाई स्थगित रखने की मांग की है।
आदित्य दीक्षित ने स्पष्ट किया कि कोटा का पर्यावरण, नागरिकों का स्वास्थ्य और किसानों की आजीविका किसी भी औद्योगिक परियोजना से कम महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर यदि स्थानीय लोगों को संभावित प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की आशंका के बीच रहना पड़े, तो ऐसी परियोजना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
प्रदूषण की आशंका को नजरअंदाज करना नगर के भविष्य से खिलवाड़!
दीक्षित ने कहा कि कोल वाशरी और रेलवे साइडिंग जैसी परियोजनाओं के मामले में वायु प्रदूषण, उड़ती धूल, पर्यावरणीय संतुलन, नागरिकों के स्वास्थ्य तथा आसपास के कृषि क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए। परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम हों और स्थानीय आबादी के हितों की सुरक्षा के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक परियोजना के संभावित दुष्प्रभावों और सुरक्षा उपायों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में जल्दबाजी क्यों की जाए? उनके अनुसार, जनहित से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण मामलों में पारदर्शिता और नागरिकों की चिंताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
NOC जारी करने की कार्रवाई स्थगित हो, पहले हो निष्पक्ष जांच
आदित्य दीक्षित ने नगर पालिका परिषद कोटा में आपत्ति दर्ज कराते हुए मांग की है कि प्रस्तावित कोल वाशरी की अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की कार्रवाई फिलहाल स्थगित रखी जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय प्रभावों, प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था, रेलवे साइडिंग से जुड़े संभावित प्रभावों और जनस्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की समुचित जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने नगर पालिका से जनहित को सर्वोपरि रखते हुए पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और नागरिकों की आशंकाओं का समाधान करने की मांग की।
नगरवासी आज नहीं जागे, तो कल उठाने पड़ सकते हैं गंभीर सवाल
दीक्षित ने कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है। यह कोटा के प्रत्येक नागरिक, किसानों, युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए इस मामले में नगरवासियों की चुप्पी उचित नहीं होगी।
उन्होंने प्रबुद्ध नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से एकजुट होकर अपनी बात रखने तथा परियोजना से जुड़े तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने की अपील की। उनका कहना है कि संभावित समस्याओं के सामने आने के बाद कदम उठाने के बजाय समय रहते सावधानी बरतना और जरूरी सवाल पूछना अधिक उचित है।
प्रेस क्लब से भी उठाई जवाबदेही तय करने की मांग
आदित्य दीक्षित ने प्रेस क्लब के सदस्यों से भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े इस विषय पर तथ्यपरक समाचारों, जनसंवाद और संबंधित विभागों से जवाब मांगने की आवश्यकता है।
उनके अनुसार, प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरणीय दस्तावेज, प्रदूषण नियंत्रण के उपाय, रेलवे साइडिंग के संभावित प्रभाव और स्थानीय नागरिकों की आपत्तियां सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बननी चाहिए, ताकि नगरवासियों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
अब नगर पालिका की भूमिका पर टिकी निगाहें
कोल वाशरी परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब नगर पालिका परिषद और संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। नगरवासियों के मन में पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान पारदर्शी प्रक्रिया और तथ्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
आदित्य दीक्षित ने दोहराया कि जब तक परियोजना के सभी जरूरी पहलुओं की जांच, पर्यावरणीय सुरक्षा और जनहित से जुड़े सवालों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक NOC जारी करने की कार्रवाई स्थगित रखने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या कोटा के पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को प्राथमिकता मिलेगी, या स्थानीय लोगों के सवाल अनसुने रह जाएंगे?
कोटा का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि हर निर्णय पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के आधार पर लिया जाए। अब देखना होगा कि नगर पालिका परिषद और संबंधित विभाग इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।




