दीपक कुमार साहू
बुलंद टाइम्स संवाददाता
देवभोग (गरियाबंद)
गरियाबंद/अमलीपदर। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड में अमलीपदर के पास स्थित ग्राम गुढ़ियारी का कांदा डोंगर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक लोककथाओं के लिए प्रसिद्ध है। चौरासीगढ़ के नाम से पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में माँ कुलेश्वरी देवी और माँ खंबेश्वरी की मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है। पहाड़ के नीचे स्थित ऐतिहासिक चाटू बंद तालाब भी यहां की विशेष पहचान है।
देवी के चाटू से बना तालाब, लोकमान्यता में दर्ज है रोचक कथा
स्थानीय मान्यता के अनुसार, चाटू बंद तालाब का निर्माण माता कुलेश्वरी देवी पार्वती के आशीर्वाद से हुआ था। कहा जाता है कि प्राचीन समय में पहाड़ पर देवी की पूजा-अर्चना के बाद भोग लगाने की विधि पूरी कर पुजारी नीचे लौट आए थे। कुछ दूर आने पर उन्हें याद आया कि वे खाना बनाने में उपयोग होने वाला चाटू यानी चम्मच पहाड़ पर ही भूल आए हैं।
इसके बाद पुजारी के निर्देश पर एक साथी चाटू लेने वापस पहाड़ पर गया। लोककथा के अनुसार, उस समय माता कुलेश्वरी देवी अन्य देवियों के साथ विराजमान थीं। जब देवी ने दोबारा आने का कारण पूछा, तो चाटू भूल जाने की बात बताई गई। मान्यता है कि इसके बाद देवी ने चाटू को पहाड़ से नीचे फेंक दिया। जहां चाटू गिरा, वहां गड्ढा बन गया, जो आगे चलकर तालाब के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
भीषण गर्मी में भी पानी की कमी नहीं होने की मान्यता
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस छोटे से ऐतिहासिक सरोवर की खासियत यह है कि भीषण गर्मी और सूखे की स्थिति में भी इसमें पानी की कमी नहीं होती। यही वजह है कि चाटू बंद तालाब धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
वरुण चक्रधारी ने बताई तालाब की ऐतिहासिक मान्यता
साहू समाज के सभापति एवं अमलीपदर हायर सेकेंडरी विद्यालय के प्राचार्य श्री वरुण चक्रधारी ने चाटू बंद तालाब से जुड़ी इस लोककथा और इसकी धार्मिक मान्यता की जानकारी दी। उनके अनुसार, यह तालाब माता कुलेश्वरी देवी पार्वती के आशीर्वाद के रूप में क्षेत्र को प्राप्त हुआ माना जाता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन की अपार संभावनाएं
कांदा डोंगर केवल एक पहाड़ी या धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय जनआस्था, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक लोककथाओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां माँ कुलेश्वरी और माँ खंबेश्वरी की पूजा-अर्चना तथा दशहरा महोत्सव की परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है।
स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों के प्रयासों से इस क्षेत्र को पर्यटन के मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाने की संभावनाएं हैं। चाटू बंद तालाब जैसी अनोखी लोककथाएं कांदा डोंगर की विरासत को और भी खास बनाती हैं।




