गरियाबंद – गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। शासन के सामने आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों के सुधरने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। मैनपुर थाना क्षेत्र के बहुचर्चित कुल्हाड़ीघाट के राजाडेरा जंगल में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 21 लाख रुपये के डंप को निकालने पहुंचे दो महिला आत्मसमर्पित नक्सलियों और उनके एक स्थानीय सहयोगी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।खास बात यह है कि यह वही कुल्हाड़ीघाट और राजाडेरा का इलाका है, जहां कभी खूंखार नक्सली लीडरों का साम्राज्य हुआ करता था और पुलिस के सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में दुर्दांत नक्सली लीडर जयराम उर्फ चलपति को ढेर करने के साथ ही इसी पहाड़ी में कई कुख्यात नक्सल कमांडरों को नेस्तनाबूद करने में बड़ी सफलता हासिल की थी।
सरेंडर के बाद भी नहीं छूटा नक्सली मोह -कुल्हाड़ीघाट के उसी जंगल से 21 लाख निकालने पहुंचे 3 पूर्व नक्सली गिरफ्तार, जहां ढेर हुआ था कमांडर चलपति!
मैनपुर क्षेत्र के जिस कुल्हाड़ीघाट राजाडेरा की पहाड़ियों में कभी गूंजती थीं गोलियां और मारे गए थे बड़े नक्सली लीडर, वहीं से बरामद हुआ 21 लाख का कैश।
चलपति की पूर्व गार्ड और दलम कमांडर महिला नक्सली अपने स्थानीय सहयोगी के साथ धरदबोची गईं।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस की घेराबंदी
मैनपुर पुलिस को मुखबिर से खास सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग कुल्हाड़ीघाट राजाडेरा जंगल में जमीन के नीचे दबाकर रखे गए नक्सलियों के गुप्त फंड को निकालने पहुंचे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इलाके की चारों तरफ से नाकेबंदी और घेराबंदी की। इसी दौरान जंगल से एक भारी बैग लेकर लौट रहे तीन संदिग्ध पुलिस को देखकर छिपने का प्रयास करने लगे। पुलिस टीम ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए तीनों को दबोच लिया।
टिफिन के अंदर छिपाए गए थे 500-500 के नोट-पकड़े गए आरोपियों के पास से एक काले रंग का बैग मिला, जिसके अंदर टिफिन पैक में 500-500 रुपये के नोटों के बंडल रखे हुए थे। गवाहों के समक्ष गिनती करने पर कुल 21 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा उनके पास से तीन मोबाइल फोन और एक टीवीएस मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान और उनका खौफनाक इतिहास
पुलिस गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है
सिंगे उर्फ रोशनी (25 वर्ष): निवासी गामगुलावर, जिला सुकमा। (यह कुख्यात नक्सली कमांडर चलपति की पूर्व गार्ड रह चुकी है)।बुधरी मुचाकी उर्फ बुदरी उर्फ सोनी (35 वर्ष) निवासी एटेगट्टा, जिला सुकमा। (यह सीनापाली दलम की पूर्व कमांडर बताई जा रही है)।नोहर मरकाम (36 वर्ष): निवासी भुतबेड़ा, थाना मैनपुर, जिला गरियाबंद। (यह नक्सलियों का स्थानीय सहयोगी है)।

ठेकेदारों और आम लोगों से की गई थी अवैध वसूली
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि बरामद 21 लाख रुपये नक्सलियों द्वारा ठेकेदारों और आम लोगों को डरा-धमकाकर अवैध वसूली के जरिए जुटाए गए थे। वर्ष 2024 में खूंखार नक्सली कमांडर चलपति ने इस बड़ी रकम को राजाडेरा जंगल में पहाड़ी के पास जमीन के अंदर छिपाकर रखा था।
पुलिस के अनुसार, दोनों महिला आरोपियों ने पहले शासन की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर दिया था और सुकमा पुनर्वास कैंप में रह रही थीं। कैंप में रहने के दौरान ही उन्होंने अपने पुराने साथी नोहर मरकाम से संपर्क किया और जंगल में छिपाकर रखे गए इस खजाने को निकालकर एक बार फिर नक्सली संगठन की गतिविधियों को आर्थिक मजबूती देने की योजना बनाई थी। हालांकि, पुलिस की सतर्कता से इनकी यह बड़ी साजिश नाकाम हो गई।
इतिहास के पन्नों से जुड़ा यह इलाका-आपको बता दें कि मैनपुर का कुल्हाड़ीघाट और राजाडेरा का जंगल कभी लाल आतंक का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था। सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और चलाए गए अभियानों के दौरान ही इसी जंगल में कुख्यात नक्सली लीडर जयराम चलपति को पुलिस ने मार गिराया था। इतना ही नहीं, इसी दुर्गम पहाड़ी और जंगल क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने कई बड़े और खूंखार नक्सली नेताओं को ढेर करने या उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने में एतिहासिक सफलताएं हासिल की हैं। एक बार फिर इसी ऐतिहासिक स्थल से नक्सलियों के करोड़ों के डंप और आत्मसमर्पित नक्सलियों की संदिग्ध संलिप्तता ने सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींच लिया है।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 61(2) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 17, 18, 20, 38 और 40 के तहत देहाती नालसी दर्ज कर ली है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों की गतिविधियों, उनकी मॉनिटरिंग और पुनर्वास प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। पुलिस मामले के अन्य सह-आरोपियों और छुपे हुए नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई है।




