योगेश्वर साहू की रिपोर्ट गरियाबंद/रायपुर
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर को पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। 1 नवंबर 2000 को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विशेष प्रयास से मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया था। तब से लेकर आज तक प्रदेश ने विकास के हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
छत्तीसगढ़ को यूं ही धान का कटोरा नहीं कहा जाता। यहां की उपजाऊ धरती, मेहनतकश किसान और समृद्ध लोक परंपरा ही इसकी असली ताकत है। छत्तीसगढ़ी बोली, लोकगीत, पंथी-राउत नाचा, सुवा नृत्य और छत्तीसगढ़ी साहित्य की पूरे देश में अलग पहचान है।
खान-पान की बात करें तो छत्तीसगढ़ी व्यंजन – चीला, फरा, ठेठरी-खुरमी, बरा, सुहारी, अईरसा का स्वाद लोगों को अपनी ओर खींचता है। वहीं संचार माध्यमों में आकाशवाणी, दूरदर्शन, समाचार पत्र और अब सोशल मीडिया ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में भी समृद्ध है। घटारानी-जतमई के झरने, विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग भूतेश्वरनाथ, त्रिवेणी संगम राजिम, महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली चंपारण, माता बम्लेश्वरी डोंगरगढ़, खल्लारी माता, चंद्रहासिनी, रतनपुर का महामाया मंदिर, बिलाई माता जैसे सैकड़ों धार्मिक और प्राकृतिक स्थल छत्तीसगढ़ के गौरव हैं।
शासन द्वारा 1 नवंबर को राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान सहित सभी जिला मुख्यालयों में राज्योत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ी लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।




