मध्यप्रदेश | रतलाम मध्यप्रदेश सरकार की तमाम सख्तियों और लोकायुक्त समेत अन्य जांच एजेंसियों की लगातार कार्रवाइयों के बावजूद मध्य प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में घूसखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। हर रोज प्रदेश के किसी न किसी विभाग में सरकारी अफसर या कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ा रहे हैं। इनपर सख्त कार्रवाई भी हो रही है, बावजूद इसके घूसखोरी के मामलों में कोई कमी नहीं आ रही है। ताजा मामला सूबे के रतलाम जिले के जावरा से सामने आया है, जहां उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने खाद्य अधिकारी को 4 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
जिले के अरनिया गुर्जर पिपलोदा में रहने वाले शिकायतकर्ता देवी सिंह गुर्जर ने उज्जैन लोकयुक्त पुलिस अधीक्षक अनिल विश्वक मामले को लेकर शिकायत की थी। शिकायत में पीड़ित ने कहा खि भोलेनाथ स्वयं सहायता समूह को आवंटित उचित मूल्य की दुकान किसी कारण वश निलंबित कर दी गई थी। उक्त उचित मूल्य की दुकान पर आवेदक की पत्नी पार्वती देवी समूह की सचिव एवं विक्रेता हैं। उक्त उचित मूल्य की दुकान की निलंबन से बहाली के लिए जावरा के कनिष्ठ खाद आपूर्ति अधिकारी प्रेम कुमार अहिरवार ने उनसे 15 हजार रिश्वत मांगी है।
जाल बिछाकर अधिकारी को दमोचा
पुलिस अधीक्षक ने डीएसपी राजेश पाठक के नेतृत्व में शिकायत का सत्यापन कराया। वहीं शिकायत सही पाए जाने पर डीएसपी राजेश पाठक के ने 8 सदस्यों का ट्रैप दल गठित कर आज अधिकारी प्रेम कुमार अहिरवार के खिलाफ ट्रेप प्लान तैयार किया और रिश्वत की पहली किस्त के 4 हजार लेते हुए अधिकारी के जावरा स्थित शासकीय आवास पर रंगे हाथों पकड़ा है।
कार्रवाई में इस टीम की रही अहम भूमिका
रिश्वतखोर अफसर को पकड़ने में डीएसपी राजेश पाठक, निरीक्षक दीपक सेजवार, प्रधान आरक्षक हितेश, आरक्षक उमेश जाटव, आरक्षक मोहम्मद इसरार और आरक्षक श्याम शर्मा की मुख्य भूमिका रही है।






