रामेश्वर सिंह क्षत्रिय जांजगीर चांपा
जांजगीर चांपा –– जिला जांजगीर- चाम्पा के अंतर्गत ग्राम कोरबी पोस्ट डोंगरी विकासखंड बलौदा मैं रहने वाले एक छोटे से किसान किसान सम्मान निधि पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार ग्राम कोरबी के रहने वाले श्री मध्येश कुमार यादव पिताश्री सियाराम यादव जिनको 2024 में सिर्फ एक बार किसान सम्मान निधि मिला है उसके बाद दोबारा पाने के लिए 2024 से लगातार पटवारी तहसीलदार एवं कलेक्टर कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं फिर भी आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है विभाग के अधिकारियों के पास जाने पर अलग-अलग प्रकार के गड़बड़ियां बताते हुए उनको अपने-अपने कार्यालय से वापस भेज देते हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान अभी तक नहीं निकाल पाए हैं और ना ही दोबारा सम्मान निधि मिला है|
यह विभाग के कर्मचारियों की निष्क्रियता को स्पष्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं एक छोटे से किसान सम्मान निधि के लिए रोज-रोज कार्यालय का चक्कर काटते रहे और समस्या का समाधान ना हो तो यह स्पष्ट हो जाता है कि कर्मचारी कितना कामचोर और निष्क्रिय हैं तो आगे और समस्याओं का यह लोग क्या हल कर पाएंगे! खाली कार्यालय में बैठकर कुर्सी तोड़ने और गप्पे मारने का काम कर रहे हैं बड़े अधिकारियों को अंधकार में डालकर अपनी अलग से रोजी-रोटी चला रहे हैं अधिकांश कर्मचारी तो ऐसे हैं|
जो मुख्यालय में भी नहीं रहते और सामान्य वर्ग के आदमी अपने-अपने कामों को छोड़कर कार्यालय के चक्कर काटते रहते हैं ऐसे कामचोर कर्मचारियों के ऊपर तुरंत कार्यवाही होना चाहिए! हम भी मीडिया के माध्यम से यह मांग करते हैं कि सारे कर्मचारी समय पर आए मुख्यालय में रहे और आम नागरिकों का कार्य समय पर करें तभी सुशासन की सरकार मानी जाएगी अन्यथा अंधेर नगरी चौपट राजा, टका शेर भाजी टका शेर खाजा कहावत वाली बात रह जाएगी! हवा हवा में बातें करने से कुछ नहीं होता आम आदमियों के काम को सहजता व सरलता पूर्वक करने से होता है |
एक सम्मान निधि के लिए अत्यंत एक छोटे से किसान बार-बार कार्यालय का चक्कर काटते रहे साथ ही साथ विधायक महोदय, सांसद महोदय एवं माननीय प्रधानमंत्री को बार-बार चिट्ठी लिखते रहे फिर भी उनकी समस्या का हाल ना हो पाए तो कितनी शर्म की बात है ऐसे में जो कर्मचारी सिर्फ कुंडली मार के बैठे हुए हैं उन लोगों को तो चुल्लू भर पानी में डूब कर मर जाना चाहिए यह कहां से सुशासन की सरकार है धरातल पर काम करने से सुशासन होता है सिर्फ विज्ञापन चला देने से नहीं!




