अमित दुबे की रिपोर्ट | रतनपुर।
रतनपुर : धार्मिक एवं पौराणिक नगरी रतनपुर में दीपावली पर्व की तैयारियों के बीच पटाखा बाजार की स्थापना को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रशासन द्वारा जारी अग्नि सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी में जिन ज्वलनशील सामग्रियों के उपयोग पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है, उन्हीं कपड़े, बांस, रस्सी और प्लास्टिक के तिरपाल का इस्तेमाल कर पटाखा दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि यह बाजार भारत सरकार द्वारा संरक्षित लगभग एक हजार वर्ष पुराने ऐतिहासिक स्मारक कण्ठी देऊल मंदिर के आसपास लगाए जाने की चर्चा है।
ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर प्रशासन की सुरक्षा संबंधी गाइडलाइन का पालन कौन सुनिश्चित करेगा? यदि पटाखा बाजार में किसी प्रकार की आगजनी या दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या दीपावली के उत्साह में नागरिकों की सुरक्षा और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को नजरअंदाज किया जा रहा है?
नगर पालिका की पारंपरिक व्यवस्था बदली, आखिर किसकी अनुमति से लग रहा बाजार?
रतनपुर में पंचायत के समय से ही दीपावली के अवसर पर पटाखा बाजार लगाने की व्यवस्था स्थानीय निकाय द्वारा की जाती रही है। नगर पालिका प्रशासन बाजार के लिए स्थान निर्धारित करने, दुकानों की व्यवस्था करने और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाता रहा है। इस व्यवस्था से शासन को राजस्व भी प्राप्त होता है।
बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार के साथ पटाखा बाजार के स्थान में भी समय-समय पर बदलाव होता रहा है। पिछले कई वर्षों से नगर पालिका परिषद कृषि उपज मंडी परिसर की खाली जमीन पर पटाखा बाजार लगाने की व्यवस्था करती आ रही थी। लेकिन इस बार मंडी परिसर में बाजार लगाने को लेकर कोई स्पष्ट तैयारी दिखाई नहीं दे रही है।
जानकारी के अनुसार, इस बार पटाखा बाजार महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट की मंदिर परिक्षेत्र स्थित खाली जमीन पर लगाए जाने की तैयारी की जा रही है। चर्चा है कि इसके लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, कोटा द्वारा अनुमति दी गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
ऐसे में कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या बाजार लगाने के लिए संबंधित विभागों से विधिवत अनुमति ली गई है? क्या अग्निशमन विभाग ने स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया है? क्या नगर पालिका प्रशासन को इसकी जानकारी है? और यदि यह व्यवस्था नगर पालिका की पारंपरिक जिम्मेदारी से अलग की गई है तो इसके पीछे प्रशासनिक आधार क्या है?
कण्ठी देऊल मंदिर की सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू भारत सरकार द्वारा संरक्षित प्राचीन स्मारक कण्ठी देऊल मंदिर के आसपास पटाखा बाजार लगाए जाने की चर्चा है।
रतनपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा यह प्राचीन मंदिर राष्ट्रीय महत्व की धरोहर है। इसके संरक्षण के लिए केंद्र सरकार द्वारा विशेष कानूनी प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।
प्राचीन संस्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 एवं वर्ष 2010 के संशोधन के प्रावधानों के अनुसार संरक्षित स्मारक की सीमा से 100 मीटर तक का क्षेत्र प्रतिषिद्ध तथा उसके आगे 200 मीटर तक का क्षेत्र विनियमित क्षेत्र घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में निर्माण और अन्य गतिविधियां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया एवं सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होती हैं।
ऐसे में यह जांच का विषय है कि प्रस्तावित पटाखा बाजार संरक्षित स्मारक की निर्धारित परिधि से कितनी दूरी पर स्थापित किया जा रहा है। क्या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से आवश्यक अनुमति अथवा अनापत्ति प्राप्त की गई है? यदि नहीं, तो इस संवेदनशील स्थल पर बाजार लगाने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है?
यह केवल दुकानों की स्थापना का मामला नहीं, बल्कि रतनपुर की ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
प्रशासन की एडवाइजरी में स्पष्ट निर्देश, फिर क्यों हो रही अनदेखी?
स्थायी एवं अस्थायी पटाखा दुकानों में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए नगर सेना, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं तथा एसडीएआरएफ, मुख्यालय छत्तीसगढ़ सेक्टर-19, अटल नगर नवा रायपुर द्वारा विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है।
इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पटाखा दुकानें कपड़े, बांस, रस्सी अथवा टेंट जैसी ज्वलनशील सामग्री से नहीं बनाई जानी चाहिए। दुकानों का निर्माण अज्वलनशील सामग्री से बने टिन शेड से किया जाना चाहिए।
इसके अलावा प्रमुख सुरक्षा निर्देश इस प्रकार हैं—
1. पटाखा दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी होना अनिवार्य है। दुकानें एक-दूसरे के ठीक सामने नहीं बनाई जानी चाहिए।
2. प्रकाश व्यवस्था के लिए तेल के दीये, गैस लैंप और खुली बिजली बत्ती का उपयोग प्रतिबंधित है।
3. विद्युत तारों के जोड़ सुरक्षित होने चाहिए तथा प्रत्येक मास्टर स्विच में फ्यूज अथवा सर्किट ब्रेकर होना चाहिए।
4. दुकानों के आसपास ट्रांसफार्मर नहीं होना चाहिए और उनके ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइन नहीं गुजरनी चाहिए।
5. प्रत्येक दुकान में पांच किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य बताया गया है।
6. दुकानों के सामने उचित अंतराल पर 200 लीटर क्षमता के पानी के ड्रम और बाल्टियों की व्यवस्था होनी चाहिए।
7. पटाखा दुकानों के सामने बाइक और कार की पार्किंग प्रतिबंधित होनी चाहिए।
8. अग्निशमन विभाग एवं एंबुलेंस के संपर्क नंबर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किए जाने चाहिए।
9. अग्निशमन वाहन के आवागमन के लिए पर्याप्त रास्ता उपलब्ध होना चाहिए।
10. पटाखा दुकानों से 50 मीटर के भीतर आतिशबाजी का प्रदर्शन प्रतिबंधित है।
एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपातकालीन नियमावली, 2021 के तहत जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

नगर पालिका के पास अग्निशमन वाहन की व्यवस्था नहीं, तो आपात स्थिति में कौन संभालेगा मोर्चा?
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि नगर पालिका प्रशासन के पास वर्तमान में अग्निशमन वाहन की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि पटाखा बाजार में आग लगने जैसी आपात स्थिति निर्मित होती है तो तत्काल राहत एवं बचाव की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
पटाखों का बाजार सामान्य व्यापारिक बाजार नहीं होता। यहां बड़ी मात्रा में विस्फोटक एवं ज्वलनशील सामग्री का भंडारण और विक्रय होता है। ऐसे में सुरक्षा के मामूली इंतजामों की अनदेखी भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है।
जनता के चुने प्रतिनिधि और प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही कहां?
रतनपुर आज ग्राम पंचायत के दौर से आगे बढ़कर लगभग 32 हजार की आबादी वाला नगर पालिका क्षेत्र बन चुका है। शहर के नागरिकों ने स्थानीय निकाय से लेकर केंद्र तक विकास और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की उम्मीद के साथ अपने प्रतिनिधियों को चुना है।
ऐसे में शहर के एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक आयोजन को लेकर यदि अनुमति, सुरक्षा और जिम्मेदारी के सवाल खड़े हो रहे हैं तो उनका जवाब मिलना भी जरूरी है।
दीपावली खुशियों, रोशनी और उल्लास का पर्व है। इस अवसर पर पटाखों की खरीदारी और आतिशबाजी की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन उत्सव की खुशियां सुरक्षित वातावरण में ही सार्थक हैं।
अब प्रशासन से जनता के सीधे सवाल
– क्या प्रस्तावित पटाखा बाजार के लिए सभी आवश्यक विभागों से विधिवत अनुमति ली गई है?
– क्या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से संरक्षित स्मारक के समीप बाजार लगाने के संबंध में अनुमति प्राप्त की गई है?
– क्या अग्निशमन विभाग ने मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था की पुष्टि की है?
– प्रतिबंधित ज्वलनशील सामग्री से दुकानें बनाई जा रही हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?
– नगर पालिका प्रशासन और अग्निशमन विभाग की भूमिका एवं जिम्मेदारी क्या है?
– किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जवाबदेही किस अधिकारी अथवा संस्था की होगी?
रतनपुर की जनता को दीपावली पर सुरक्षित बाजार चाहिए, न कि ऐसा इंतजाम जहां उत्सव की आड़ में सुरक्षा नियमों और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण से समझौता होने की आशंका बनी रहे।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन सवालों को गंभीरता से लेकर समय रहते जांच और आवश्यक कार्रवाई करता है या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की कवायद शुरू होगी।




