सुनील साहु की रिपोर्ट ;-
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है जिसका उद्देश्य भारत के सभी नागरिकों में देशभक्ति, समाजसेवा, और समरसता की निस्वार्थ भावना भरकर उनके व्यक्तित्व का निर्माण करना है। संघ का यह मानना है कि भारत एक राष्ट्र है और इस राष्ट्र के बोध का निर्माण सांस्कृतिक भारत के पुनर्निर्माण के माध्यम से किया जा सकता है।
आरएसएस अपने दैनिक शाखाओं में ऐसे सज्जन व्यक्तियों का निर्माण करता है जो देश और समाज के प्रति सोचने वाले हों। इन शाखाओं में व्यक्तित्व निर्माण के माध्यम से शक्तिशाली समाज का निर्माण होता है, जिससे देश परम वैभव को प्राप्त कर सकता है। संघ का उद्देश्य यह है कि वह समाज में समरसता, उन्नति, संगठन और विकास के माध्यम से एक संगठित और विकसित भारत का निर्माण करे।
आरएसएस का यह मानना है कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय के प्रति भेदभाव करना या किसी को जीतने का प्रयास करना संघ का उद्देश्य नहीं है। संघ केवल उन तत्वों के खिलाफ है जो इस राष्ट्र के दुश्मन हैं। भारत में विभिन्न धर्म और सम्प्रदाय के लोग रहते हैं और संघ उनके पूजा प्रार्थना की विधियों का सम्मान करता है। संघ का मानना है कि नए देवी-देवताओं की पूजा से भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर कोई असर नहीं पड़ता।
आरएसएस का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की किसी भी कोशिश का विरोध करना है। संघ विभिन्न प्रकार के सेवा कार्य करता है और देशभक्ति सिखाता है। हालांकि, कुछ देश विरोधी ताकतें और स्वार्थी राजनैतिक ताकतें संघ के खिलाफ भ्रामक और झूठी जानकारियाँ फैलाकर संघ को बदनाम करने का प्रयास करती हैं।
संघ का कार्य और उद्देश्य विस्तार से इस प्रकार है:
1. राष्ट्रीय एकता और अखंडता: संघ का मुख्य उद्देश्य भारत में राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देना है। इसके लिए संघ देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी शाखाओं के माध्यम से लोगों को जोड़ने का कार्य करता है।
2. सांस्कृतिक पुनर्निर्माण: संघ भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने और संरक्षित करने का कार्य करता है। यह भारत की विविधता में एकता के सिद्धांत पर आधारित है।
3. समरसता और सामाजिक न्याय: संघ समाज के सभी वर्गों में समरसता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। इसके लिए संघ विभिन्न प्रकार के सेवा कार्य करता है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, और ग्रामीण विकास।
4. देशभक्ति और समाजसेवा: संघ अपने सदस्यों में देशभक्ति और समाजसेवा की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। इसके लिए संघ विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।
5. धार्मिक सहिष्णुता: संघ सभी धर्मों और सम्प्रदायों के प्रति सहिष्णुता का प्रदर्शन करता है और उनके पूजा प्रार्थना की विधियों का सम्मान करता है।
6. राष्ट्रविरोधी ताकतों का विरोध: संघ उन तत्वों के खिलाफ है जो राष्ट्र के दुश्मन हैं और राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की कोशिश करते हैं। संघ इन तत्वों के खिलाफ जनजागरण का कार्य करता है।
7. शक्तिशाली समाज का निर्माण: संघ का मानना है कि शक्तिशाली समाज का निर्माण ही एक शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। इसके लिए संघ विभिन्न प्रकार के समाजसेवा कार्य करता है और समाज के सभी वर्गों में समरसता और संगठन को बढ़ावा देता है।
आरएसएस का उद्देश्य केवल संगठन को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों में एकता, अखंडता, और समरसता को बढ़ावा देना है, ताकि भारत एक शक्तिशाली और विकसित राष्ट्र बन सके।



