अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर | रतनपुर भैरव मंदिर के समीप आरक्षित कृषि भूमि का अवैधानिक रूप से प्लाटिंग कर गैर कृषि प्रयोजनों हेतु बेचा जा रहा है, जिससे शहरी क्षेत्रों के अनियंत्रित विकास को बढ़ावा मिल रहा है । कृषि भूमि को छोटे – छोटे टुकड़ो में बेचने से एक ओर जहाँ नक्शों का अद्यतीकरण नही हो पा रहा है,वहीं दूसरी ओर सीमांकन का कार्य भी नही हो पा रहा है। जिससे भूमि विवाद में वृद्धि हो रही है । छत्तीसगढ़ भू – राजस्व संहिता की धारा 98 के अंतर्गत बनाये गये नियमों में यह स्पष्ट प्रावधान है कि कृषि भूमि का 0.05 एकड़ अथवा 0.05 रूपये लगान से कम उपखण्ड न किये जायें ।
ऐसी स्थिति में कृषि भूमि को छोटे – छोटे टुकड़ो में बेचना उक्त नियमों के विपरीत है । इसके बावजूद रतनपुर नगरपालिका अंतर्गत भैरव मंदिर के पास टुकड़े टुकड़े में काटकर खरीदी बिक्री की जा रही है जबकि यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति कृषि भूमि को बिना व्यपवर्तित किये तथा कॉलोनी निर्माण के बिना रजिस्ट्रिीकरण कराये, आवासीय प्रयोजन हेतु छोटे-छोटे टुकड़ो में विक्रय करता है तो उसका यह कृत्य अवैध कालोनी निर्माण के श्रेणी में आएगा ।
नियम कायदे को ताक पर रखकर प्लाटिंग
शासन – प्रशासन के सारे नियमो को ताक पर रखकर यहां भैरव मंदिर के समीप खेत खलिहान की भूमि को आवासीय प्लाट के रूप में खरीदी बिक्री हो रही है इसके चलते प्लाट खरीदने वाले लोग भविष्य में परेशानी में फंस सकते हैं । भैरव मंदिर के पास के प्लाटिंग में बिक्री आवासीय प्लाट के रूप में बेधड़क हो रही है ।
बिना कॉलोनाइजर एक्ट के प्लाटिंग
कृषि योग्य भूमि को प्लाट के रूप में विकसित कर खरीदी बिक्री के लिए नियमानुसार डायवर्सन करना पड़ता है। एक से अधिक प्लाट काटने के बाद नियमानुसार (कॉलोनाइजर) एक्ट के तहत् सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसकी खरीदी बिक्री होनी चाहिए। लेकिनभेरावमन्दिर के समीप बिना पंजीयन के ही आवासीय कॉलोनी डेव्हलप हो रहे हैं
बेखौफ है भू – माफिया
भैरव मंदिर के पास जमीन दलालों के वायदे और झूठे कागजात के फेर में फंसकर जमीन व मकान खरीदने वाले लोगों को बाद में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है लोगो को डायवर्सन व एनओसी के लिए कलेक्ट्रोरेट व नगरीय निकाय दफ्तर के चक्कर काटना पड़ सकता है|
भू माफियाओं के झांसे में आए लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ सकता है । इसके बावजूद भैरव मंदिर के पास तेजी से बढ़ रहे अवैध प्लाटिंग के कारोबार को रोकने शासन प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है ।



