हेमू साय की रिपोर्ट:-
जगदलपुर। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने बताया कि जगदलपुर शहर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान दलपत सागर को संवारने हेतु 9.88 करोड़ की राशि स्वीकृत कराए जाने के लिए मैं विधायक किरण देव जी को धन्यवाद व साधुवाद देता हूं। यह जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से प्राप्त हुई, जो वास्तव में प्रसन्नता की बात है।
किन्तु इस सौंदर्यीकरण प्रयास के साथ-साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वर्षों पुराना विवाद भी पुनः सामने आता है। यह स्मरण कराना आवश्यक है कि जब वर्तमान विधायक महोदय नगर निगम जगदलपुर के महापौर थे, तब उनके कार्यकाल में दलपत सागर के किनारे एक विवादित बंड (बैरियर/बांध) का निर्माण कराया गया था जिसने जलाशय के प्राकृतिक कैचमेंट एरिया को दो भागों में विभाजित कर दिया। उस समय इस कार्य का भारी विरोध हुआ, किंतु तत्कालीन भाजपा सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया।
बाद में कांग्रेस सरकार आने पर भी एनजीटी में मामला लंबित होने का हवाला देकर उस विवादित बंड को हटाने से प्रशासन ने हाथ पीछे खींच लिया। वास्तव में दलपत सागर का मूल क्षेत्रफल और अस्तित्व तभी स्पष्ट हो पाएगा, जब इस कृत्रिम बंड को हटाया जाएगा। जैसे ही यह बंड हटेगा, जल अपने आप अपना प्राकृतिक विस्तार कर देगा और दलपत सागर का वास्तविक स्वरूप जगजाहिर होगा।
इसलिए मैं प्रेस के माध्यम से विधायक किरण देव जी से आग्रह करता हूं कि 9.88 करोड़ की स्वीकृत राशि का सदुपयोग करते हुए सबसे पहले इस बंड को हटाया जाए, ताकि सौंदर्यीकरण कार्य किसी दिखावे का हिस्सा न बने, बल्कि दलपत सागर के अस्तित्व की रक्षा और पुनर्स्थापना की दिशा में सार्थक पहल हो।
यह भी स्मरणीय है कि माननीय विधायक जी स्वयं राज परिवार का एक हिस्सा हैं, और यह ऐतिहासिक जलाशय महाराजा दलपत देव के नाम पर बना है। अतः यह अवसर उनके समर्पण और दृष्टिकोण को प्रमाणित करने का उपयुक्त क्षण है। यदि यह बंड बना रह गया और सौंदर्यीकरण केवल ऊपरी साज-सज्जा तक सीमित रह गया, तो यह एक बार फिर दलपत सागर को छलने जैसा होगा। और स्वयं दलपत सागर फिर एक बार खुद को छला हुआ महसूस करेगा।
अब देखने की बात यह है कि विधायक महोदय दलपत सागर के वास्तविक उत्थान हेतु क्या ठोस कार्ययोजना बनाये हैं।



