अमित दुबे की रिपोर्ट ;-
रतनपुर। धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में अवैध शराब बिक्री का धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। वार्ड नंबर 2 के पार्षद ने अवैध शराब बिक्री पर रोक लगाने के लिए कई बार आवेदन एवं शिकायत पत्र संबंधित अधिकारियों को दिए हैं, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
सूत्रों के अनुसार वार्ड नंबर 2 में कुछ स्थानों पर लंबे समय से अवैध दारू की बिक्री चल रही है। स्थानीय लोग इस अवैध गतिविधि से परेशान हैं। दिन-रात शराबियों की भीड़, गाली-गलौज और असामाजिक तत्वों की आवाजाही से आम नागरिकों का जीवन दूभर हो गया है। महिलाओं और बच्चों के लिए मोहल्ले से गुजरना भी मुश्किल हो गया है।
पार्षद ने बताया कि उन्होंने लिखित आवेदन पुलिस प्रशासन और नगर परिषद दोनों को दिया है, लेकिन अब तक न कोई छापा मारा गया और न ही अवैध बिक्री बंद हुई। इससे यह प्रश्न उठता है कि आखिर प्रशासन किसके दबाव में मौन है? क्या यह अवैध कारोबार किसी “ऊँचे संरक्षण” में चल रहा है?
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक नगरी रतनपुर की पहचान आस्था और संस्कृति की रही है, लेकिन अब शराब माफियाओं के कारण शहर की छवि धूमिल हो रही है।
शहर के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन शीघ्र ही सख्त कदम नहीं उठाता, तो जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी। नागरिकों ने मांग की है कि वार्ड नंबर 2 सहित पूरे रतनपुर में अवैध दारू बिक्री के खिलाफ अभियान चलाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि शहर की पवित्रता और शांति बरकरार रह सके।
नागरिकों की अपील:
“हम रतनपुर को पुनः धार्मिक और शुद्ध वातावरण वाला शहर देखना चाहते हैं, जहां आस्था की गूंज हो, न कि नशे का अड्डा बने।”



