अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर। नेशनल हाइवे-130 पर बिलासपुर से रतनपुर के बीच रानीगांव में ड्राइवरों की सुविधा और सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया अत्याधुनिक “रेस्ट प्वाइंट” आज बदहाली का शिकार हो चुका है। कभी लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक, बस और अन्य वाहन चालकों के लिए सुरक्षित विश्राम स्थल के रूप में विकसित किया गया यह रेस्ट एरिया अब देखरेख के अभाव में खंडहर जैसा नजर आने लगा है।
इस रेस्ट प्वाइंट का मुख्य उद्देश्य था कि चालक थकान महसूस होने पर सुरक्षित स्थान पर रुककर आराम कर सकें, जिससे नींद या थकान के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके। लेकिन वर्तमान हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। रेस्ट प्वाइंट की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं, शौचालयों पर ताले लटके हैं, पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह ठप है और साफ-सफाई का नामोनिशान तक नहीं है।

रात के समय यहां रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं होने से यह स्थान असुरक्षित बन गया है। अंधेरे और सुनसान माहौल के कारण चालक यहां रुकने से कतराते हैं। नतीजतन उन्हें मजबूरी में सड़क किनारे या अव्यवस्थित ढाबों पर वाहन रोकना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका और भी बढ़ जाती है।
इस संबंध में हाइवे निर्माण एजेंसी अडानी ग्रुप के एक मैनेजर ने बताया कि रेस्ट एरिया को पूरी साज-सज्जा और मूलभूत सुविधाओं के साथ तैयार कर संबंधित विभाग को हैंडओवर कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, “निर्माण के बाद रेस्ट प्वाइंट को विभाग को सौंप दिया गया था। इसके आगे रख-रखाव और संचालन की जिम्मेदारी विभाग की है।”
वहीं दूसरी ओर, स्थानीय वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। ड्राइवरों का आरोप है कि नेशनल हाइवे विभाग की उदासीनता और लापरवाही के चलते करोड़ों की लागत से बनी यह सुविधा बेकार पड़ी है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत, सफाई, बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था कर दी जाए, तो यह रेस्ट प्वाइंट सैकड़ों चालकों के लिए बड़ी राहत बन सकता है और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आ सकती है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि यह मामला केवल सुविधा का नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़ा है।
यदि ड्राइवरों को सुरक्षित और सुविधाजनक विश्राम स्थल नहीं मिलेगा, तो थकान की स्थिति में वाहन चलाना मजबूरी बन जाएगा, जिसका सीधा असर दुर्घटनाओं की संख्या पर पड़ेगा।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग कब तक इस ओर ध्यान देता है और कब तक यह रेस्ट प्वाइंट अपने उद्देश्य के अनुरूप चालकों के लिए उपयोगी बन पाता है, या यूं ही बदहाली का शिकार बना रहेगा।



