अमित दुबे की रिपोर्ट:-
रतनपुर। धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक पहचान से समृद्ध रतनपुर की जीवनरेखा माने जाने वाले तालाब अब एक बार फिर अपनी खोई हुई रौनक लौटाने की तैयारी में हैं। केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के तहत रतनपुर के ऐतिहासिक रत्नेश्वर तालाब और कृष्णार्जुनी तालाब के नवीनीकरण, पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 17 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। यह मंजूरी आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई है।
यह परियोजना केवल निर्माण या सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि रतनपुर के जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व केंद्र सरकार के राज्यमंत्री स्वच्छता अभियान के तहत रतनपुर पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शहर के प्रमुख तालाबों की जर्जर स्थिति को नजदीक से देखा—टूटी हुई मेड़ें, जमा गंदगी, जलभराव का अभाव और सूखते जलस्रोत। उस दौरान स्थानीय बुज़ुर्गों और नागरिकों ने मंत्री को बताया था कि कभी इन्हीं तालाबों से पूरे क्षेत्र की प्यास बुझती थी और धार्मिक अनुष्ठानों, मेलों एवं पर्वों के दौरान यहाँ चहल-पहल और उत्सव का माहौल रहता था। निरीक्षण के बाद मंत्री ने जल संरक्षण को प्राथमिकता देने और रतनपुर के तालाबों को पुनर्जीवित करने का भरोसा दिलाया था। अब अमृत 2.0 योजना के तहत मिली यह मंजूरी उसी आश्वासन का ठोस परिणाम मानी जा रही है।

लवकुश कश्यप (अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद रतनपुर)
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत तालाबों की गहरीकरण, मजबूत मेड़ निर्माण, साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण, हरित क्षेत्र विकास और जलधारण क्षमता बढ़ाने जैसे कार्य किए जाएंगे। इससे न केवल वर्षा जल का संरक्षण होगा, बल्कि भूजल स्तर में सुधार भी देखने को मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि तालाबों के पुनर्जीवन से पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा, और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी सृजित होंगे।सौंदर्यीकरण के बाद ये तालाब धार्मिक यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह योजना रतनपुर के लिए केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि अपनी विरासत और जल-संस्कृति को बचाने का संकल्प है। यदि कार्य तय समय और गुणवत्ता के साथ पूरे होते हैं, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और रतनपुर अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ आधुनिक विकास की ओर कदम बढ़ाएगा।
रतनपुर के तालाबों में लौटने वाली यह रौनक सिर्फ पानी नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और भविष्य की उम्मीदों को भी संजोकर रखेगी।



