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बदहाली में नौनिहाल, झोपड़ी में चल रहा आंगन बाड़ी केंद्र, कार्यकर्ताओं ने अपने पैसे से बनाई छत।
बुलंद टाइम्स न्यूज, गरियाबंद। केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा बुनियादे शिक्षा उपलब्ध केन्द्र बच्चों के प्रारंभिक रिक्षा पोषण और व्य की नीव होते है इसके बावजूद गरियाबंद जिले के आदिवामी विकासखण्ड मैनपुर वनांचल कंत्र दर्जनों स्थानों पर आंगनबाड़ी केन्द्र प्रोपहियों में जर्जर भवनों में पढ़ाई करने के लिए कोटे-छोटे बच्चों को मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला मैनपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत समुद्रा से निकरणकर सामने आई है सरकारी वेजनाओं के बड़े बड़े दवों के बीच जमीनी होती देखने को मिल रहा है। यहां मला एवं बाल विकास विभाग को घोर लापरवाही और प्रशासनिक समेत कमी के कारण मासूम टी चनों का किन एक झोपड़ी के नीचे अंधकारमय हो रहा है। इस
व्यवस्था को देखकर शासन के नौनिहाल विकास के चार्यों को धज्जियां उड़तीस नजर आ रही है।
बदहाल आंगनबाड़ी भवनों में नौनिहाल हो रहे परेशान…
आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर दूरस्थ वनांचल क्षेत्रे मे आंगनबाड़ी की स्थिति नहीं सुधर रही है जिसके कारण इसका असर बच्चों और गर्भवती माताओं पर पड़ रहा है कई आंगनबाड़ी भवनों में न तो शौचालय की व्यवस्था है न ही पानी की सुविधा। इस बारिश के दिनों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम बड़ेगोबरा स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र की स्थिति बेहद ही खराब हो गई है। भवन बेहद जर्जर हो गया है, दरवाजा चैनलगेट टूट गया है और तो और यहा बिजली नही होने के कारण बच्चो के लिए पंखा की सुविधा नहीं है पानी की भी सुविधा नही है जिसके कारण छोटे-छोटे बच्चे एवं गर्भवती माताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ेगोबरा आंगनबाड़ी में कुल 15 बच्चे है और यह आंगनबाड़ी काफी वर्षों पुराना होने के कारण बेहद जर्जर हो गया है जिसके कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गोबरा के उपसरपंच सालिक राम विश्वकर्मा ने बताया की नया आंगनबाड़ी भवन बनाने की मांग कई बार कर चुके है लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सिस्टम सोया रहा कर्मचारियों ने जेब से बनाई झोपड़ी…
मिली जानकारी के अनुसार जो तथ्य सामने आया है हैरान करने वाली बात यह है कि इस टेकेनपारा में आंगनबाड़ी केंद्र के लिए कोई भी सरकारी भवन नहीं है। विभागीय उदासीनता को देखते हुए बच्चों की पढ़ाई और पोषण को जारी रखने के लिए केंद्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने सरकारी मदद का इंतजार किए बिना, अपनी खुद की पैसे खर्च कर एक अस्थाई झोपड़ी का निर्माण किया। आज इसी झोपड़ी के नीचे झमाझम बारिश के बीच बच्चे बैठने को मजबूर हैं, जिससे हमेशा किसी हादसे या बीमारी का खतरा बना रहता है।




