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नक्सलवाद से मिली आजादी- तीन दशक बाद दुर्गम पहाड़ी आमामोरा, ओढ़ ,मटाल में पहली बार शान से लहराया तिरंगा।
नक्सली लीडर जयराम चलपती सहित एक दर्जन से ज्यादा नक्सलियों को इसी पहाड़ी इलाके में पुलिस ने मार गिराने में सफलता हासिल किया था।
नक्सलियों के डर से कभी घर में दुबक जाते थे लोग अब ध्वजारोहण करने गांव में उमड़े ग्रामीणो का सैलाब।
कुल्हाड़ीघाट के इसी पहाड़ी इलाके में नक्सली लीडर जयराम चलपति सहित दो दर्जन से अधिक करोड़ों के इनामी नक्सलियों को पुलिस ने मार गिराने में सफलता प्राप्त किया।
बुलंद टाइम्स न्यूज/अख्तर मेमन
गरियाबंद। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट की दुर्गम पहाड़ियों पर बसे आमामोरा, ओढ ,मटाल और भालूडिग्गी ग्रामो में इस स्वतंत्रता दिवस एक नया इतिहास रचा गया। पिछले तीन दशकों से नक्सली दहशत के साये में जी रहे इस इलाके में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पहली बार शान से राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।
लंबे समय तक नक्सलियों का मजबूत गढ़ रहे इस इलाके को सुरक्षाबलों ने कड़ी मशक्कत और सफल अभियानों के बाद नक्सल मुक्त कराया है। इसी पहाड़ी इलाके में पुलिस ने एक बड़े मुठभेड़ के दौरान शीर्ष नक्सली लीडर जयराम चलपति सहित एक दर्जन से अधिक इनामी नक्सलियों को ढेर कर क्षेत्र को लाल आतंक के प्रभाव से मुक्त कराया गया था। क्षेत्र के नक्सल मुक्त होने के बाद गांव में आजादी का असली जश्न देखने को मिला। तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद जब तिरंगा फहराया गया, तो स्थानीय ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी और सुकून साफ झलक रहा था।वर्षों बाद गांव में गूंजे “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों ने न केवल पहाड़ियों को गुंजायमान किया, बल्कि स्थानीय निवासियों के मन में विकास और सुरक्षा की एक नई उम्मीद भी जगाई है।
15 अगस्त 2026 घुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे ताराझर ,कुर्वापानी, भालूडिग्गी एव मटाल गांव के लिए सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि इतिहास बदलने वाला दिन बन गया जिस पहाड़ी पर कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, उसी पहाड़ी पर राष्ट्रगान, देशभक्ति गीत और भारत माता के जयकारों की गूंज सुनाई दी।घने जंगल और कई किलोमीटर की खड़ी पहाड़ी चढ़ाई पार कर इन ग्रामों में पहुंचना पड़ता है,नक्सलवाद के दौर में इस इलाके में ग्रामीण भय के माहौल में जीवन गुजारते थे स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण करना भी यहां संभव नहीं था नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पहले एक औपचारिकता निभाई जाती थी,
जिस पहाड़ी पर चलती थीं गोलियां, वहीं पहली बार फहराया तिरंगा…
जिस पहाड़ी में पहले गोलियों की आवाज गूंजती थी नक्सलियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था अब नक्सली मुक्त घोषित होने के बाद उसी पहाड़ी गांव में एक और ऐतिहासिक तस्वीर देखी गई स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुरक्षा बलों के जवान ग्रामीणों के साथ मटाल की पहाड़ी पर पहुंचे और पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया, तिरंगा फहराते ही पूरा पहाड़ी इलाका राष्ट्रगान और भारत माता के जयकारों से गूंज उठा, सुरक्षा बलों के जवानों और ग्रामीणों ने एक साथ तिरंगे को सलामी दी, देशभक्ति गीतों के बीच ग्रामीणों में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
इस पहाड़ी इलाका में सितंबर 2025 को हुआ था बड़ा एनकाउंटर…
कुल्हाड़ीघाट मटाल ,ताराझर, कुर्वापानी क्षेत्र में सितंबर 2025 को हुए बड़े नक्सल विरोधी अभियान के बाद पुरे प्रदेश और देश में यह इलाका चर्चा में आया था मैनपुर के जंगल क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में एक करोड़ रुपए के इनामी नक्सली कमांडर मनोज मोडेम उर्फ बालकृष्ण समेत कुल 10 नक्सली मारे गए थे अभियान में छत्तीसगढ़ पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और कोबरा की टीमें शामिल थीं। और तो और इसी क्षेत्र में बड़े नक्सली लीडर जयराम चलपती को भी पुलिस ने मुठभेड़ में मारकर ढेर कर दिया था,सुरक्षा बलों के अनुसार, मुठभेड़ के बाद मौके से हथियार और नक्सली सामग्री भी बरामद हुई थी। इस पहाड़ी इलाके में दो दर्जन से अधिक नक्सलियों को पुलिस ने मार गिराने में सफलता प्राप्त किया
सीआरपीएफ कमांडर ने बताया…
सीआरपीएफ 65 वी बटलियन कुल्हाड़ीघाट कैंप कमांडर सुधीर कुमार ने बताया माटल में आजादी के 80 वर्षों बाद पहली बार तिरंगा ध्वज फहराया गया है सीआरपीएफ के जवान और ग्रामीण एक साथ मिलकर स्वतंत्रता दिवस मनाएं ग्रामीणों में भारी खुशी देखने को मिली उन्होंने आगे बताया क्षेत्र में शांति सुरक्षा और लोगों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।




