भोपाल | महल जैसा करोड़ों का घर, आलीशान इंटीरियर, डायमंड और सोने के लकदक जेवर और विदेशों में सैर सपाटा… कुछ ऐसी लाइफस्टाइल थी एमपी के इस अफसर की। लोकायुक्त की टीम ने जब भोपाल नगर निगम के रिटायर्ड इंजीनियर प्रदीप कुमार जैन के घर पर छापा मारा तो उनका ऐशोआराम देखकर दंग रह गई। कमाई का ऐसा चस्का लगा था कि रिटायरमेंट के बाद भी प्रदीप कुमार जैन भोपाल स्मार्ट सिटी में संविदा पर बड़े अफसर बन गए। लोकायुक्त छापे के बाद सरकार ने सख्ती दिखाते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया है।
भोपाल लोकायुक्त को स्मार्ट सिटी में संविदा इंजीनियर प्रदीप कुमार जैन की आय से अधिक संपत्ति के संबंध में शिकायत मिली थी। इस पर लोकायुक्त ने छापा मारा तो जैन की 5 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति का खुलासा हुआ।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक आंकलन के अनुसार उनकी कमाई से 300 गुना अधिक संपत्ति पाई गई है। एयरपोर्ट रोड पर उनका महल जैसा घर है जोकि एक करोड़ रुपए से ज्यादा का है। यह घर एयरपोर्ट रोड स्थित पॉश लार्ड्स कॉलोनी में बना है।
घर के साथ इंजीनियर प्रदीप जैन के ऑफिस में भी छापेमारी की गई थी। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद स्मार्ट सिटी दफ्तर में हड़कंप मच गया। अब सरकार ने प्रदीप कुमार जैन पर सख्ती दिखाई है। लोकायुक्त के छापे के बाद उन्हें भोपाल स्मार्ट सिटी में संविदा इंजीनियर के पद से बर्खास्त कर दिया गया है।
भोपाल स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के अनुसार अधीक्षण यंत्री पीके जैन की सेवाएं अब यहां से समाप्त कर दी गई है। भोपाल नगर निगम में अधीक्षण यंत्री के पद से रिटायर होने के बाद वे स्मार्ट सिटी में संविदा पर नियुक्त किए गए थे।
बताया जा रहा है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में प्रदीप जैन को वित्तीय अधिकार भी दिए गए थे। लोकायुक्त भोपाल को जब उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली तो इसका सत्यापन किया गया। लोकायुक्त ने प्रदीप जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट से सर्च वारंट लिया। इसके बाद 9 अगस्त को उनके घर और ऑफिस में छापे मारे गए।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार प्रथम दृष्टया आय से करीब 300 प्रतिशत अधिक संपत्ति सामने आई है। घर में 5 करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति का पता चला, 85 लाख की जूलरी के बिल मिले, कई जगहों पर निवेश और विदेश यात्रा के भी दस्तावेज मिले। बैंकों में लॉकर की जांच अभी की जानी है।



