कमलेश सिंह की रिपोर्ट :-
वट सावित्री पूजा हिंदू संस्कृति में विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख उत्सव है, जो अपने पतियों और परिवार की भलाई और दीर्घायु के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष वट सावित्री व्रत 26 मई 2025 को मनाया गया।
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट सावित्री व्रत का उद्देश्य सुखमय और स्थायी विवाह का आशीर्वाद प्राप्त करना है। इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा किये, जो तीन प्रमुख देवताओं: ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक है। महिलाएं अपने पति के लिए सुरक्षा और सौभाग्य की कामना के लिए इस अवधि के दौरान उपवास रखी।
पूजा विधि
वट सावित्री व्रत पर महिलाएं जल्दी उठकर तिल और आंवले से स्नान कर फिर, वे नए वस्त्र पहनती हैं और खुद का सोलह-श्रृंगार करती हैं। बरगद के पेड़ की पूजा करते समय वे उसके चारों ओर एक पीला या लाल धागा लपेटती हैं, जल, फूल और चावल चढ़ाती हैं और प्रार्थना करते हुए उसकी परिक्रमा करती हैं।
शुभ मुहूर्त
वट सावित्री व्रत पूजा का मुहूर्त 26 मई को अभिजीत मुहूर्त में करना बेहद शुभ माना जाता है। सुबह 11 बजकर 51 मिनट से 3 बजे तक का मुहूर्त सबसे शुभ है। इसके अलावा, अमृत मुहूर्त प्रातः 05:25 से प्रातः 07:08 तक, शुभ मुहूर्त सुबह 08:52 बजे से सुबह 10:35 बजे तक और लाभ मुहूर्त दोपहर 03:45 बजे से शाम 05:28 बजे तक है।
वट सावित्री व्रत की कहानी
वट सावित्री व्रत के उपवास रखने वाली महिलाओं ने वट सावित्री पूजा के संबंध मे विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए विधि विधान सहित बताया कि
देवी सावित्री इतनी समर्पित थीं कि उन्होंने अपने पति सत्यवान के जीवन को बहाल करने के लिए भगवान यमराज को मना लिया। परिणामस्वरूप, विवाहित महिलाएं वट वृक्ष और देवी सावित्री का सम्मान करती हैं, और अपने परिवार के लिए उनका आशीर्वाद मांगती हैं।
व्रत का पारण
व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद जलपान कर करना चाहिए। वट सावित्री व्रत के दौरान जरूरतमंदों को दान देना बेहद पुण्यकारी होता है। कई व्यक्ति उन लोगों को धन, भोजन और कपड़े दान करते हैं जिन्हें सहायता की आवश्यकता होती है।



