
अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर, बिलासपुर (छ.ग.)। श्रद्धा और संस्कृति की ऊंचाइयों को छूता बज्र गणेश उत्सव इस बार अपने गौरवशाली 11वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह आयोजन अब केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक संदेशों का सबसे बड़ा पर्व बन चुका है। इस वर्ष काबज्र आयोजन पहले से कहीं अधिक भव्य और ऐतिहासिक होने वाला है।
स्थापना महोत्सव – 27 अगस्त, रात 7 बजे
ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और हजारों दीपों की रोशनी में बप्पा की स्थापना होगी। उस क्षण पूरा रतनपुर एक विशाल मंदिर का स्वरूप ले लेगा और भक्तों की जयकारे से वातावरण गूंज उठेगा –
“गणपति बप्पा मोरया!”
दैनिक आरती – सुबह 9 बजे और शाम 7:30 बजे
प्रतिदिन आरती में उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ भक्ति रस की धारा में बहकर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेगी।
हवन पूजन – 6 सितम्बर, शाम 7 बजे
आयोजन का एक विशेष पड़ाव होगा हवन पूजन, जिसमें अग्नि में आहुतियाँ अर्पित कर वातावरण को शुद्ध और ऊर्जावान बनाया जाएगा।
आयोजन स्थल
मेन रोड, पुराना बस स्टैंड, सावन स्वीट के बाजु, रतनपु
विशेष आकर्षण — इस बार का उत्सव बनेगा यादगार
आगमन समारोह – 24 अगस्त, रात 7 बजे
विशेष प्रस्तुति देंगे बंटी घूमाल ग्रुप, बिलासपुर। उनकी झांकियों का जादू, धमाकेदार नृत्य और आतिशबाज़ी रतनपुरवासियों को रोमांच से भर देगा।
विसर्जन शोभायात्रा – 11 सितम्बर, शाम 4 बजे
बप्पा की विदाई का दृश्य अद्भुत होगा। राजा घूमाल ग्रुप, दुर्ग की अगुवाई में विशाल झांकियाँ, ढोल-नगाड़े, भक्ति संगीत और भव्य आतिशबाज़ी के बीच गणेश जी की विदाई होगी। यह नजारा रतनपुरवासियों की स्मृतियों में सदैव जीवंत रहेगा।
समिति का निमंत्रण
बज्र गणेश उत्सव समिति, रतनपुर ने नगरवासियों और आसपास के ग्रामवासियों से अपील की है कि वे अपने परिवार, मित्रों और बच्चों-बड़ों के साथ शामिल होकर इस आयोजन को सफल बनाएं।
यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि रतनपुर की रगों में दौड़ती श्रद्धा की धड़कन है। यह उत्सव हर दिल में गणपति बप्पा का मंदिर बनाता है और एकता, भक्ति और संस्कृति का संदेश देता है।



