सुरेश सोनी की रिपोर्ट:-
नारायणपुर, छत्तीसगढ़ — जिला अस्पताल नारायणपुर दिन-प्रतिदिन अपनी चिकित्सा सेवाओं और उपलब्धियों से नई ऊँचाइयों को छू रहा है। उपचार की गुणवत्ता और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के मामले में यह अस्पताल अब मेडिकल कॉलेजों के बराबर खड़ा नज़र आ रहा है। चाहे रोगियों की देखभाल हो, प्रबंधन हो या जटिल हस्तक्षेपात्मक प्रक्रियाएँ, जिला अस्पताल ने लगातार उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है।
हाल ही में अस्पताल में दो गंभीर मरीजों को भर्ती किया गया, जो क्रमशः मैनपुर और मलमेटा क्षेत्र से आए थे। दोनों ही रोगियों को गंभीर द्विपक्षीय प्लूरल इफ्यूजन(अत्याधिक मात्रा में छाती के तीनो हिस्से में पानी भर चुका था ) ,अत्यधिक सांस फूलना, चेहरे पर सूजन तथा पूरे शरीर में सूजन जैसी समस्याओं के साथ लाया गया था। उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी—रक्तचाप मात्र 68/40 और ऑक्सीजन संतृप्ति 60–70 प्रतिशत तक गिर चुकी थी।
ऐसी गंभीर परिस्थिति में भी जिला अस्पताल नारायणपुर ने मरीजों को नई जिंदगी दी। डॉ. हिमांशु सिन्हा के नेतृत्व में आईसीयू में एक सप्ताह तक सीमित संसाधनों में गहन देखभाल की गई। हड़ताल में नर्सिंग स्टाफ की कमी होने के बावजूद —मनीषा सरकार, दिलीप पोयाम, मोहिता नाग और मंजुलता—ने दिन-रात अपनी सेवाएँ देकर मरीजों को स्थिर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आवश्यक दवाओं और चिकित्सीय हस्तक्षेप के बाद दोनों मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अब अपने घर लौट पा रहे है ।
इन रोगियों के परिजन बेहद गरीब और अशिक्षित पृष्ठभूमि से आते हैं, जिन्हें इलाज की ज्यादा जानकारी नहीं थी, परंतु उनका एकमात्र विश्वास जिला अस्पताल नारायणपुर था। अंततः वही विश्वास साकार हुआ और आज वे खुशी-खुशी अपनी मां को सुरक्षित घर ले जा पाने की ओर अग्रसर है ।
सिविल सर्जन-सह-अस्पताल अधीक्षक डॉ विनोद भोयर ने कहा जिला अस्पताल नारायणपुर ने एक बार फिर उत्कृष्ट कार्य किया है। गंभीर स्थिति में आए दोनों मरीजों को समय पर चिकित्सा व आईसीयू देखभाल देकर स्वस्थ किया गया। डॉ. हिमांशु सिन्हा व नर्सिंग टीम की निष्ठा सराहनीय है। यह उपलब्धि अस्पताल की बढ़ती क्षमताओं और मरीजों के विश्वास को दर्शाती है।
जिला अस्पताल नारायणपुर की यह उपलब्धि न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को दर्शाती है बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भी उच्चस्तरीय इलाज संभव है।



