बीरेंद्र चतुर्वेदी की रिपोर्ट :-
सुकमा | केंद्र सरकार की बेहद महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन की शुरुआत 15 अगस्त 2019 को शुरू हुई थी. इस मिशन का लक्ष्य साल 2024 तक भारत के हर गांव में नल से पेयजल उपलब्ध कराना था. लेकिन योजना में कुछ ऐसी खामियां हैं जिससे ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है लेकिन नल जल योजना जनता के लाभ और सुविधा के लिए नहीं, बल्कि केवल ठेकेदारों की कमाई के लिए एक संसाधन बनकर रह गया है |

सुकमा जिले के छिंदगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत रोकल में आज भी पानी की समस्या से परेशान हो रहे हैं ग्रामीण यहां नल जल योजना जनता के लाभ और सुविधा के लिए नहीं बल्कि ये केवल ठेकेदारों की कमाई के लिए एक संसाधन बनकर रह गया है. रोकल पंचायत में पानी टंकी तो बना पर पानी टंकी के अंदर एक शराब पीने का अड्डा बन गया है यहां नल जल योजना लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए नहीं, बल्कि ठेकेदारों की कमाई कराने के लिए है|

. नल जल योजनाओं का सुरुआत किया है लेकिन नल जल योजना के लिए बना हुआ पानी टंकी के गुणवत्ता के अभाव में खराब पड़ा हुआ है. गांव में केवल दिखावे के लिए पानी टंकी खड़ा है. गांव में इन बेकार बने पानी टंकी का कोई उपयोग नहीं है. वहीं, ग्रामीणों को पानी को लेकर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. छिंदगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत रोकेल के इस गांव में लगभग 5 सौ 95 घर हैं, जिसमें कुछ के घरों में तो पानी की निजी व्यवस्था है, पर ज्यादातर घरों के लोगों को इधर-उधर से पानी का जुगाड़ करना पड़ता है.|



