विकास भुवाल ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट से:-
बेमेतरा : जनपद पंचायत बेरला, जिला बेमेतरा में मनरेगा श्रमिकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में प्रोजेक्ट उन्नति के तहत एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। मनरेगा में 60 दिवस कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है, जिससे वे अपनी आजीविका के अधिक सशक्त अवसरों से जुड़ सकें और मनरेगा पर निर्भरता कम कर सकें।
सफलता की शुरुआत: प्रशिक्षण से बदलती ज़िंदगियाँ
कलेक्टर रणवीर शर्मा के निर्देशन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिशिर शर्मा के मार्गदर्शन में पात्र श्रमिकों का चयन कर चोरभट्टी स्थित लाइवलीहुड कॉलेज कैंपस में RSETI के माध्यम से 30 दिवसीय मेंशन ट्रेनिंग शुरू की गई है। यह प्रशिक्षण 6 दिसंबर 2025 से आरंभ होकर अगले एक माह तक चलेगा। इस प्रशिक्षण में रांका, कठिया, तिवरियां, देवरी, सरदा, आन्दू, अछोली सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों के 30 मनरेगा श्रमिक शामिल हुए हैं। इनमें 2 महिला श्रमिक भी प्रमुख रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण का मजबूत संदेश दे रही हैं। सफल संचालन हेतु नवीन यादव एवं लक्ष्मीकांत वर्मा, तकनीकी सहायक बेरला को प्रशिक्षण प्रभारी नियुक्त किया गया है।

पहले दिन मिला उत्साह और दिशा
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस RSETI के डायरेक्टर ने सभी प्रशिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए नियमित उपस्थिति, अनुशासन एवं कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। वहीं कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कश्यप ने श्रमिकों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण भविष्य में आपको कुशल श्रमिक के रूप में अधिक रोजगार उपलब्ध कराएगा। शासन द्वारा प्रोजेक्ट उन्नति के माध्यम से निःशुल्क प्रशिक्षण की यह सुविधा आपके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाएगी।
आजिविका से जुड़े अनेक अवसर
प्रोजेक्ट उन्नति के माध्यम से श्रमिकों को अनेक ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाता है—
कृषि, पशुपालन, ब्यूटी पार्लर, फास्ट फूड, हस्तशिल्प आदि। साथ ही प्रशिक्षण के दौरान श्रमिकों को स्टाइपेंड का लाभ भी दिया जाता है।
पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया
मनरेगा में 60 दिन कार्य करने वाले श्रमिक आयु 18 से 45 वर्ष | श्रमिक अपने निकटतम ग्राम पंचायत कार्यालय या जनपद पंचायत कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। प्रोजेक्ट उन्नति के अंतर्गत शुरू हुआ यह प्रशिक्षण रोजगार के नए अवसरों का द्वार खोल रहा है। कौशल सीखकर न केवल श्रमिकों की आय बढ़ेगी, बल्कि वे आत्मनिर्भर और सशक्त भी बनेंगे। बेरला के श्रमिकों की यह पहल आने वाले दिनों में जिले के लिए एक प्रेरणादायक सफलता कहानी के रूप में उभरेगी।






