सुरेश सोनी की रिपोर्ट :-
नारायणपुर : नारायणपुर में आज सवाल सिर्फ मक्का के दाम का नहीं था, सवाल था किसान की इज्जत और उसके हक का। जिस मक्का को उगाने में किसान ने पसीना बहाया, उसी मक्का का दाम सरकार और सिस्टम ने आधे से भी कम कर दिया। इसी अन्याय के खिलाफ आज नारायणपुर की सड़कों पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। मक्का के समर्थन मूल्य, बिजली, स्मार्ट मीटर और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर किसानों ने प्रशासन को खुली चुनौती दे दी।
नारायणपुर जिला—जहां खेती ही आजीविका का सबसे बड़ा साधन है—आज वहीं किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सोमवार को जिले के सैकड़ों किसान साप्ताहिक बाजार धरना स्थल पर एकजुट हुए और विशाल रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने निकले। किसानों का आरोप है कि सरकार की नीतियां किसान विरोधी हैं और प्रशासन उनकी आवाज दबाने का काम कर रहा है।
किसानों ने साफ कहा कि पड़ोसी जिला कोंडागांव में मक्का का समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक दिया जा रहा है, जबकि नारायणपुर के किसानों को वही मक्का 1400 से 1500 रुपये में बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सवाल यह है कि एक ही राज्य, एक ही फसल—तो फिर दाम में इतना बड़ा फर्क क्यों?
जैसे ही किसान रैली के रूप में कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े, प्रशासन ने हाई स्कूल चौक के पास बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। यहीं से हालात बिगड़ गए। किसान कलेक्टर से सीधे मुलाकात पर अड़ गए, वहीं प्रशासन उन्हें आगे बढ़ने से रोकता रहा। कई घंटे तक सड़क पर तनाव का माहौल बना रहा। किसानों और प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हुई, लेकिन किसानों का गुस्सा ठंडा नहीं पड़ा।
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, कृषि दवाइयां और डीजल महंगे हो चुके हैं, ऊपर से बिजली बिलों में भारी कटौती और स्मार्ट मीटर थोपे जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर किसानों की जेब पर सीधा हमला है, जिससे बिजली बिल कई गुना बढ़ रहा है। इसके साथ ही किसानों ने नारायणपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले में स्थानीय युवाओं को रोजगार और आरक्षण देने की मांग भी जोरशोर से उठाई। किसानों का कहना है कि बाहर के लोग नौकरियां ले जा रहे हैं और स्थानीय युवा बेरोजगार घूमने को मजबूर हैं।
किसानों की एक और अहम मांग खाद और कृषि दवाइयों को जीएसटी से मुक्त करने की है। उनका कहना है कि जब खेती को सरकार “रीढ़” बताती है, तो उसी खेती से जुड़े सामान पर टैक्स क्यों वसूला जा रहा है?
“हम नारायणपुर के किसान कोई दूसरे दर्जे के नागरिक नहीं हैं। कोंडागांव में मक्का 2400 में बिकता है और हमें 1400–1500 में बेचने को मजबूर किया जाता है।
यह सीधा अन्याय है। बिजली बिल, स्मार्ट मीटर, खाद पर जीएसटी—हर तरफ से किसान को लूटा जा रहा है। अगर सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानीं, तो यह आंदोलन और बड़ा होगा।”
नारायणपुर में आज किसान सिर्फ ज्ञापन देने नहीं, बल्कि सरकार से जवाब मांगने सड़क पर उतरे थे। अब सवाल प्रशासन और सरकार से है—क्या किसानों को उनका हक मिलेगा, या फिर नारायणपुर की सड़कों पर यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा? अगर समय रहते फैसला नहीं हुआ, तो यह गुस्सा आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन में बदल सकता है।



