चांदनी बिहारपुर से लाल बहादुर यादव की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल ने अब शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पंगु कर दिया है। प्राथमिक शाला मोहरसोप, प्राथमिक शाला ठुठियापारा एवं माध्यमिक शाला मोहरसोप में हड़ताल के दूसरे दिन भी एक भी कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचा, जिसके चलते सभी स्कूलों में ताले लटके रहे और परिसर वीरान नजर आया।
सुबह स्कूल समय पर जब बच्चे पढ़ने पहुंचे, तो उन्हें बंद गेट और लटके ताले मिले। मजबूरन विद्यार्थियों को बिना पढ़ाई के वापस लौटना पड़ा। लगातार दूसरे दिन स्कूल बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है, वहीं ग्रामीण अभिभावकों में गहरा रोष और चिंता देखी जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले ही क्षेत्र में शैक्षणिक संसाधनों की कमी है, ऊपर से इस तरह की हड़ताल ने बच्चों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है।
> “बच्चों की गलती क्या है? पढ़ाई का नुकसान कौन पूरा करेगा?” — अभिभावकों का सवाल।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेशभर में कर्मचारी तीन दिनों तक हड़ताल पर रहेंगे, जिससे आने वाले दिनों में भी शासकीय स्कूलों और अन्य विभागों के कामकाज पर गंभीर असर पड़ना तय है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो हड़ताल और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
हड़ताली कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर शासन ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं दूसरी ओर, लगातार बंद स्कूलों ने शासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

बड़ा सवाल
बच्चों की पढ़ाई के नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या शासन जल्द समाधान निकाल पाएगा या हड़ताल और लंबी चलेगी?



