अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर | जल संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये की सरकारी राशि खर्च कर बेलगहना क्षेत्र में जो एनीकट बनाई जा रही है, वह भविष्य की सिंचाई योजना नहीं बल्कि संभावित आपदा का दस्तावेज बनती जा रही है। जल संसाधन विभाग के पेंड्रा डिवीजन अंतर्गत डोंगा नाला पर निर्मित यह एनीकट अब भ्रष्टाचार की ‘रेत की दीवार’ के रूप में पहचानी जाने लगी है। मौके पर जारी निर्माण कार्य को देखकर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि यह संरचना इंजीनियरिंग मानकों पर नहीं, बल्कि ठेकेदार की मनमानी और विभागीय लापरवाही पर खड़ी की जा रही है।
घटिया सामग्री, कमजोर नींव और शून्य निगरानी
स्थानीय ग्रामीणों और जानकारों का आरोप है कि निर्माण में
मानकविहीन रेत, आवश्यकता से काफी कम सीमेंट, और घटिया गुणवत्ता की गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। कई स्थानों पर एनीकट की दीवारें पहले से ही कमजोर नजर आ रही हैं। न तो उचित क्योरिंग की जा रही है और न ही किसी तकनीकी अधिकारी की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है।

पहली बारिश बनेगी असली परीक्षा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी गुणवत्ता के साथ काम जारी रहा, तो यह एनीकट पहली ही तेज बारिश में दरक सकती है या पूरी तरह ढह सकती है। ऐसी स्थिति में न सिर्फ सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान होगा, बल्कि आसपास के खेतों, नालों और किसानों की फसलों को भी भारी क्षति पहुंचेगी।
एसी कमरों में बैठकर ‘उत्कृष्ट कार्य’ का तमगा
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जमीनी सच्चाई से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। आरोप है कि अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर कागजों में कार्य को ‘उत्कृष्ट’ घोषित कर रहे हैं, जबकि हकीकत मौके पर कुछ और ही बयान कर रही है।
ठेकेदार–विभाग की मिलीभगत का आरोप
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार और विभागीय अफसरों के बीच गहरी सांठगांठ है। इसी वजह से गुणवत्ता, सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों को दरकिनार कर सिर्फ बिल पास कराने की जल्दबाजी दिखाई दे रही है।
किसानों के लिए वरदान या भ्रष्टाचार का स्मारक?
जिस एनीकट को किसानों की सिंचाई सुविधा और जल संरक्षण के उद्देश्य से बनाया जा रहा था, वही आज ग्रामीणों की नजर में भ्रष्टाचार का स्थायी स्मारक बनती जा रही है। यदि समय रहते स्वतंत्र जांच नहीं हुई, तो यह परियोजना किसानों के लिए लाभ नहीं बल्कि खतरा बन सकती है।
अब सवालों के घेरे में विभाग
क्या जल संसाधन विभाग इस निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराएगा?
क्या ठेकेदार पर गुणवत्ता से समझौते के लिए सख्त कार्रवाई होगी?
या फिर करोड़ों की जनता की गाढ़ी कमाई यूं ही नालों की रेत में समाती रहेगी?
बेलगहना की यह एनीकट अब सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की अग्निपरीक्षा बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जिम्मेदार विभाग जागता है या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई की जाती है।



