अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर/बिलासपुर। धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सत्ता और रसूख की कथित सांठगांठ को भी उजागर किया है। शासन की होम स्टे योजना के तहत विधिवत संचालित “राम दरबार अतिथि निवास (होम स्टे)” को अचानक सील किए जाने से पीड़ित परिवार आर्थिक, मानसिक और सामाजिक संकट में आ गया है। न्याय न मिलने से आहत संचालक देवकुमार थवाईत ने 21 जनवरी 2026 से परिवार सहित आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
एक छोटी औपचारिक कमी, लेकिन कार्रवाई सिर्फ एक पर?
पीड़ित देवकुमार थवाईत के अनुसार उन्होंने नगर पालिका रतनपुर से विधिवत गुमास्ता लाइसेंस प्राप्त कर शासन की निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप “राम दरबार अतिथि निवास” का संचालन शुरू किया था।
9 जनवरी 2026 को तहसीलदार रतनपुर शिल्पा भगत द्वारा “सुरक्षा जांच” के नाम पर होम स्टे को सील कर दिया गया। कारण बताया गया—गेस्ट रजिस्टर में आगमन एवं प्रस्थान समय का उल्लेख नहीं होना।

देवकुमार का सवाल है कि
“यदि यही नियम है, तो रतनपुर के अन्य लॉज, होटल और धर्मशालाओं में भी यही कमी है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ मेरे होम स्टे पर ही क्यों?”
इस चयनात्मक कार्रवाई ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
राजनीतिक रसूख के दम पर प्रताड़ना का आरोप
पीड़ित ने अपने पड़ोसी राजू शर्मा एवं स्वीटी शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दोनों अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर लगातार प्रशासन पर दबाव बनाते रहे हैं।
देवकुमार का दावा है कि इसी दबाव के चलते उनके प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि तहसीलदार के एक करीबी व्यक्ति के माध्यम से पैसों की मांग की गई और मना करने पर सील हटाने से इनकार कर दिया गया। यदि यह आरोप सही सिद्ध होते हैं, तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग की गंभीर श्रेणी में आएगा।
रोजगार छिना, परिवार बेघर होने की कगार पर
होम स्टे सील होने से देवकुमार थवाईत का पूरा परिवार आजीविका संकट में फंस गया है।
पर्यटन पर निर्भर यह व्यवसाय पूरी तरह ठप हो चुका है, जिससे परिवार के सामने रोज़ी–रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही।
21 जनवरी से आमरण अनशन की चेतावनी
न्याय की सभी उम्मीदें टूटने के बाद देवकुमार थवाईत ने घोषणा की है कि वे 21 जनवरी 2026 से “राम दरबार अतिथि निवास” के सामने परिवार सहित आमरण अनशन पर बैठेंगे।


उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि—
“अनशन के दौरान यदि मेरे या मेरे परिवार के साथ कोई भी अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राजू शर्मा, स्वीटी शर्मा और तहसीलदार शिल्पा भगत की होगी।”
जनता के सवाल, प्रशासन कटघरे में
यह मामला अब केवल एक निजी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक हित और प्रशासनिक ईमानदारी का बड़ा मुद्दा बन चुका है। स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है और वे सवाल पूछ रहे हैं—
क्या रतनपुर में कानून सबके लिए समान है?
क्या प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है?
क्या आम नागरिक को न्याय पाने के लिए आमरण अनशन जैसा कदम उठाना पड़ेगा?
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला सत्ता–प्रशासन की कथित ‘जुगलबंदी’ का एक और उदाहरण बनकर रह जाएगा।



